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Raigarh पत्नी की न्यूड फोटो वायरल करने वाले पति तनवीर को अभी खानी ही पड़ेगी जेल की रोटी

रायगढ़ के द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश जितेन्द्र कुमार ठाकुर ने दूसरी जमानत अर्जी भी ठुकराई

Damrua News/रायगढ़। प्रेम का भौंरा बनकर विवाह रचाने और 15 साल बाद अपनी उसी पत्नी को छोड़ कर दूसरी के साथ लीला रचाने और जब पत्नी ने अपने जीवन-यापन के लिए न्यायालय में भरण-पोषण प्राप्त करने अर्जी लगाई तो उसे वापस लेने का दबाव बनाने, पत्नी की न्यूड फोटो उसके सगे संबंधियों को वायरल करते हुए धमकी देने वाले बहुचर्चित आरोपी तनवीर सिंह को भला कौन नहीं जानता। ये आरोपी पिछले लगभग 2 माह से जेल की रोटी खानी पड़ रही है और फिलहाल यह रोटी ही उसका नसीब भी बन गई है, क्योंकि आरोपी तनवीर सिंह की ओर से रायगढ़ के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय के समक्ष दूसरी बार जमानत पाने अर्जी लगाई थी , जिसमें उसकी ओर से उसे जेल से रिहा करने की विनती की गई थी, लेकिन द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश जितेन्द्र कुमार ठाकुर ने दूसरी जमानत अर्जी को भी ठुकराते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया है।

इसके पूर्व 23/02/2024 को श्रीमान् द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश  जितेन्द्र कुमार ठाकुर के न्यायालय ने एवं दिनांक 21/02/2023 को रायगढ़ के न्यायालय श्रीमान् न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी कुमारी प्रीति के न्यायालय में भी आरोपी तनवीर की ओर से जमानत पाने अर्जी लगाई गई थी जिसे आपत्तिकर्ता/पीड़िता की अधिवक्ता उपासना कुलदीप की आपत्ति के बाद तथ्यों का अवलोकन करते हुए माननीय दोनों न्यायालयों ने जमानत आवेदन खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट में भी लगाया गया था बेल, लेकिन वापस लेना पड़ा

आरोपी तनवीर सिंह की ओर से जमानत पाने लगातार प्रयास किया जा रहा है, इसी प्रयास में जब रायगढ़ के लोवर और अपर कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी तो उसने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में बेल पिटीशन प्रस्तुत किया जहां खारिज होने के भय से उसे वापस ले लिया गया था। इस प्रकरण में 16/04/2024 को चालान प्रस्तुत होते ही आरोपी की ओर से रायगढ़ के द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश जितेन्द्र कुमार ठाकुर की अदालत में आरोपों को अपने नजरिये से प्रस्तुत कर जेल से रिहा करने की फरियाद की थी लेकिन यहां से उसे राहत नहीं मिल सकी है, अब एक बार फिर से आरोपी को घर की रोटी खाने हाईकोर्ट की ओर निहारना होगा।

आरोपी और पीड़िता पक्ष की ओर से न्यायालय में क्या-क्या बातें कही गईं

आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने जहां आरोपी पर लगे आरोपों को नकारते हुए यह कहा कि प्रश्नाधीन न्यूड फोटो मिरर फोटो है और उसे आरोपी ने नहीं खींचा था। आरोपी को प्रकरण में झूठा फंसाया जा रहा है, वह झलमला का स्थाई निवासी है और इसलिए कहीं भागेगा नहीं। इसलिए न्यायालय उसे जमानत का लाभ दे दे, वहीं पीड़िता की अधिवक्ता एवं अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक विमला महंत ने अपराध की गंभीरता एवं पीड़िता को दी गई धमकी को देखते हुए साथ ही समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ रहे ऐसे घिनौने अपराध की रोकथाम करने एक कड़ा संदेश देने की आवश्यक का न्यायालय के समक्ष निवेदन किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद रायगढ़ के द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश जितेन्द्र कुमार ठाकुर ने आरोपी की जमानत अर्जी यह कहते हुए ठुकरा दिया कि- ‘‘प्रकरण में अभियोग पत्र पेश हो चुका है, प्रकरण में जिस तरह से अपराध कारित किया जाना अभिकथित किया गया है उससे प्रकरण गंभीर प्रकृति का दर्शित होता है । प्रकरण के उपरोक्त समस्त परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्त को जमानत का लाभ दिया जाता है तो उसके द्वारा न्यायालयीन साक्ष्य के पूर्ण प्रकरण से संबंधित तात्विक साक्ष्य को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से प्रभावित कियये जाने तथा उसके फरार हो जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। अभियुक्त के विरूद्ध इस स्तर पर प्रथम दृष्टया आरोपित अपराध में संलिप्तता स्पष्ट दर्शित होती है। अतः ऐसी स्थिति में प्रकरण के उपरोक्त समस्त परिस्थितियों तथा कारित अपराध की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त को जमानत का लाभ दिये जाने बावत् यह उचित प्रकरण दर्शित नहीं होता है। परिणामतः अभियुक्त तनवीर सिंह की ओर से प्रस्तुत द्वितीय जमानत आवेदन पत्र धारा 439 दं.प्र.सं. विचारोपरांत स्वीकार योग्य नहीं होने से अस्वीकार कर खारिज किया जाता है। ‘‘

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