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ओपी को मुख्यमंत्री बनाने मिला “1 लाख 29 हजार” का बड़ा जनादेश, अब बड़ा आदमी बना कर वायदा निभाएं शाह !

प्रकाश स्वयं को सिद्ध नहीं कर सके रायगढ़ विधानसभा का "नायक"

डमरूआ न्यूज/रायगढ़। ओपी चौधरी के पक्ष में मतदान की अपील करने देश के गृह मंत्री अमित शाह आए 9 नवम्बर को हुए थे तब उन्होंने रायगढ़ विधानसभा के मतदातों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग ओपी चौधरी को विधायक बनाओ इन्हें बडा़ आदमी बनाने की जवाबदारी हमारी है। केन्द्रीय गृह मंत्री शाह की इस अपील को मानते हुए और रायगढ़ से मुख्यमंत्री होने का अपना सपना पूरा करने के लिए न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी जान लगा दी बल्कि पूरे विधानसभा के मतदाताओं ने भी दिल खोल कर भाजपा प्रत्याशी ओपी चौधरी को 1,29,134  अपना मत देते हुए एवं 64,443 मतों की लीड देकर अपना कर्तव्य निभा दिया है , अब बारी भाजपा पार्टी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अपने वायदे को पूरा करने की है, अब वे अपने किए गए वायदे पर खरे उतरते हुए ओपी चौधरी को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाएं। यदि पार्टी की ओर से ऐसा नहीं किया गया अथवा शाह की वाणी सत्य साबित नहीं हुई तो उन्हें आने वाले अन्य चुनावों में यहां के मतदाताओं का आक्रोष देखने के लिए भी तैयार रहना होगा।

ओपी को मिला प्रबुद्धजनों का साथ

भाजपा प्रत्याशी ओपी चौधरी को जिस दिन से अधिवक्ताओं एवं पत्रकारों का खुलकर समर्थन मिला उसी दिन से यह चुनाव धर्म वर्सेस अधर्म में तब्दील हो गया। एक ओर पढ़े लिखे प्रबुद्धजन खड़े दिखाई देने लगे तो दूसरी ओर कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स और समर्थक खड़े दिखने लगे। अचानक हुए इस घटनाक्रम का पूरे चुनाव अभियान में एक व्यापक असर पड़ा और पूरा चुनावी माहौल एक तरफा ओपी के पक्ष में एक लहर के रूप में तब्दील हो गया।

यूथ ऑईकॉन को मिला युवाओं का खुलकर समर्थन

प्रदेश के युवा ओपी चौधरी को अपना यूथ ऑईकॉन मानते हैं, यह खरसिया विधानसभा का दुर्भाग्य था कि इतना योग्य प्रत्याशी पिछले विधानसभा चुनाव में पाने के बाद भी उन्होंने ओपी के महत्व को नहीं पहचाना था, लेकिन इस चुनाव में रायगढ़ के मतदाता खास तौर पर युवा मतदाताओं को ओपी से काफी उम्मींदें हैं, पूरे चुनाव कैम्पेनिंग में युवा उनके साथ सेल्फी लेते हुए उनसे अपने कॅरियर पर भी चर्चा करते नजर आए वहीं युवाओं ने अपने घरों में भी ओपी के पक्ष में माहौल बनाकर उस माहौल को वोट में भी तब्दील कर दिया।

ओपी की चुनावी रणनीति का नहीं कोई तोड़

इस विधानसभा चुनाव में ओपी चौधरी न केवल कांग्रेस से लड़े बल्कि उन्हें भितरघातियों से भी खूब लड़ना पड़ा , लेकिन उन्होंने इस दौरान यह बिल्कुल भी जाहिर नहीं होने दिया कि वो भितरघातियों से लड़ रहे हैं। चुनाव के दौरान यह भी देखने में आया कि उनके साथ चलने वाले या अपनेपन का एहसास कराने वाले पार्टी के ही कुछ लोग उनकी हार के लिए सतरंज की पूरी बिसात बिछा कर बैठे हुए हैं, लेकिन ओपी चौधरी ने इन स्थितियों को भांपते हुए एवं पिछले खरसिया विधानसभा में उनसे हुई इसी चूक से सबक लेते हुए अपने मोहरों को आशंकित मोर्चों पर तैनात कर संभावित गड़बड़ी की घेरा बंदी कर दी। यदि यह दूरदृष्टि और रणनीति नहीं बनाई गई होती तो भितरघातियों की चाल कामयाब हो सकती थी, ऐसी चर्चा है।

प्रदेश में ओपी की योग्यता वाला अन्य कोई विधायक नहीं

पूरे प्रदेश में हुए चुनाव और भाजपा के पक्ष में आए नतीजों को देखने के बाद मुख्यमंत्री के लिए सर्वाधिक योग्यता रखने वाला विधायक ओपी चौधरी को ही माना जा रहा है। पूर्व आईएएस के रूप में उनके द्वारा किए गए कार्यों की झलक केवल एक विधानसभा को नहीं बल्कि पूरे प्रदेश को मिल सके इस लिहाज से भी यह जरूरी है कि ओपी चौधरी को ही मुख्यमंत्री बनाया जाए ताकि प्रदेश में भाजपा की बिगड़ी हुई तस्वीर व लोकप्रियता को पुनः बेहतर विकासकार्यों द्वारा सुधारा जा सके।

प्रकाश नायक को क्यों मिली इतनी करारी शिकश्त

चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस के विधायक प्रकाश नायक की हार के बारे में लोगों की मिली जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इन प्रतिक्रियाओं में सबसे बड़ी प्रतिक्रिया यह है कि वो अपनी छवि और व्यक्तित्व को जितना संवारना था उतना नहीं संवार सके। वो केवल कुछ लोगों का नायक ही बन कर खुस होते रहे, जबकि एक विधायक के लिहाज से उन्हें अपना व्यक्तित्व पूरे विधानसभा क्षेत्र के नायक के रूप में स्थापित करना था जिसमें असफल रहे। चर्चा यह भी हो रही है कि वो तो ठीक हैं लेकिन उनके साथ रहने वाले कथित गुण्डा तत्वों ने उनकी छवि नायक से ज्यादा खलनायक के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत की है, बावजूद इसके यह सब जानते और समझते हुए भी उन्होंने अपनी छवि को सुधारने का प्रयास करने के बजाए ‘‘मुझे पहचानों मैं हूं डॉन‘‘ जैसे फिल्मी गीतों पर थिरकते नजर आते रहे। इन सब के अलावा जो दो बातें और हो रही हैं उनमें से एक यह कि जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर मुट्ठी भर लोगों के इशारे पर चलना और दूसरा पिछले चुनाव में संयोग से मिली जीत को अपनी लोकप्रियता का भ्रम पालते हुए, पूरे पांच साल अपनी मूल लोकप्रियता को बढ़ाने कोई ठोस कार्य नहीं किया। अब प्रकाश नायक को उक्त किन्हीं कारणों से इतनी बुरी हार मिली या फिर ओपी के व्यक्तित्व से मतदाता प्रभावित हुए यह दोनों ही पार्टियों के लिए विश्लेषण और मंथन का विषय होना चाहिए। बहरहाल प्रकाश नायक यदि संभावित सरिया विधानसभा में चुनाव लड़ना चाहते हों तो उसके लिए भी उन्हें अपनी छवि और कथित गुण्डातत्वों को दुरूस्त तो करना ही होगा, वर्ना हाल वहां भी यही होगा। बेहतर होगा कि वो अपने छोटे भाई कैलाष नायक को इस दिषा में आगे बढ़ाएं क्योंकि उनकी छवि अपने बड़े भाई प्रकाश नायक की छवि से कई गुना बेहतर समझी जा रही है, ऐसी चर्चा है।

रायगढ़ विधानसभा में किसको कितना मिला जनता का आशिर्वाद

विधानसभा रायगढ़ से भारतीय जनता पार्टी के ओमप्रकाश चौधरी को 1,29,134 मत प्राप्त हुए। वहीं क्रमश: इंडियन नेशनल कांग्रेस से प्रकाश शक्राजीत नायक को 64691, आम आदमी पार्टी से गोपाल बापोडिय़ा को 1074, बहुजन समाज पार्टी से पुष्पलता टंडन को 1652, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)से मधुबाई को 605, आजाद जनता पार्टी से कान्ति साहू को 130, समाजवादी पार्टी से नजीर अहमद को 130, हमर राज पार्टी से भवानी सिंह सिदार को 165, छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी से भुवनलाल पटेल को 119, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी से  सुनील मिंज को 171, निर्दलीय अशोक गार्डिया को 128, निर्दलीय इबरार अहमद को 193, गुरूवारी जीनत परवीन को 401, निर्दलीय गोपिका गुप्ता को 899, निर्दलीय नारायण दास को 244, निर्दलीय, बृजमोहन अग्रवाल को 1342, निर्दलीय  राधेश्याम शर्मा को 557, निर्दलीय शंकर लाल अग्रवाल को 1819 एवं निर्दलीय सुरेन्द्र सिदार को 96 मत प्राप्त हुए।
इस तरह भारतीय जनता पार्टी के ओमप्रकाश चौधरी 64,443 मतों से विजयी हुए।

विधानसभा खरसिया में किसको कितना मिला जनता का आशिर्वाद

विधानसभा क्षेत्र 18-खरसिया से इंडियन नेशनल कांग्रेस के उमेश पटेल को 1,00988 मत प्राप्त किए। वहीं क्रमश: भारतीय जनता पार्टी से महेश साहू को 79332, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे.) परिमल यादव को 859, आम आदमी पार्टी से प्रवीण विजय जायसवाल को 2335, हमर राज पार्टी से भवानी सिंह सिदार को 1243, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी से यशवंत निषाद को 447, निर्दलीय गोवर्धन राठिया को 472, निर्दलीय विनोद चन्द्र सिंह राठौर को 517 मत प्राप्त हुए।
इस तरह इंडियन नेशनल कांग्रेस के उमेश पटेल 21656 मतों से विजयी हुए।

विधानसभा क्षेत्र लैलूंगा के मतगणना परिणाम

लैलूंगा से इंडियन नेशनल कांग्रेस की विद्यावती सिदार को 84666 मत प्राप्त हुए। वहीं क्रमश: भारतीय जनता पार्टी से सुनीती सत्यानंद राठिया को 80490, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)से मनीषा गोंड को 1512, हमर राज पार्टी से अजय कुमार पंकज को 1539, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से रघुवीर राठिया को 2186, बहुजन मुक्ति पार्टी से श्रवण भगत को 564, निर्दलीय भजन सिदार को 980 एवं निर्दलीय महेन्द्र कुमार सिदार को 1398 मत प्राप्त हुए।
इस तरह इंडियन नेशनल कांग्रेस की विद्यावती सिदार 4176 मतों से विजयी हुई।

धरमजयगढ़ के परिणाम

विधानसभा क्षेत्र 19-धरमजयगढ़ से इंडियन नेशनल कांग्रेस के लालजीत सिंह राठिया को 90493 मत प्राप्त हुए। वहीं क्रमश: भारतीय जनता पार्टी से हरिशचन्द्र राठिया को 80856, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)से जोगेन्द्र एक्का को 2451, बहुजन समाज पार्टी से सत्यबती राठिया को 2191, बहुजन मुक्ति पार्टी से अनुप बरवा को 1776, हमर राज पार्टी से महेन्द्र सिदार को 1086 एवं निर्दलीय सुनील खेस्स को 1714 मत प्राप्त हुए।
इस तरह इंडियन नेशनल कांग्रेस के लालजीत सिंह राठिया 9637 मतों से विजयी हुए।

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