रायगढ़

हाथियों का झुंड खेत में तैयार धान की फसल को पहुंचा रहा नुकसान…

डमरुआ न्युज/रायगढ़। जिले के वन मंडल धरमजयगढ़ में सबसे अधिक किसान ग्रामीण हाथियों से सहमे हुए रहते हैं। जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों का दल विचरण करते हुए धान की फसल को पैरों तले रौंदते है।

कुछ दिनों पूर्व धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज से मांड नदी पार कर 10 हाथियों का दल खरसिया रेंज में आ गया है । घनी आबादी वाले गावों में हाथी दल विचरण कर रहा है। इस दल में 2 बच्चे भी है। वर्तमान में किसानों द्वारा लगाए गए धान के फसल पक कर तैयार हो चुकी है। जिनकी कटाई कर किसान उसे खरीदी केन्द्र में बिक्री करने की तैयारी में लगे हुए हैं। धान की खूशबू से भी हाथी खेतों की ओर दौड़े चले आते हैंऔर खेतों में धावा बोल कर धान की फसल को सफाचट कर रहे हैं। जिससे किसान चिंतित हैं। हाथियों को गावों से दूर जंगल की ओर खदेड़ने के बजाय विभागीय अधिकारी अनर्गल बयान दे रहे हैं।

उनके अनुसार हाथियों को कोई रोक नहीं सकता है, वो जहां भी जितना नुकसान करेंगे उसकी भरपाई करने की बात कही जा रही है। जबकि किसान सालभर मेहनत कर धान की खेती करते हैं, वहीं उनकी मेहनत पर पानी फिरने के बाद भी उन्हें विभाग की तरफ से संतुष्टिपूर्वक जवाब नहीं मिल रहा है। अब तक हाथी दल ने दर्जनों किसानों के फसल को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन विभाग द्वारा अब तक नुकसानी का आंकलन भी नहीं किया जा सका है। किसानों की मानें तो विभाग द्वारा मुआवजा देने में भी काफी लेटलतीफी होती है, जिससे वो परेशान हैं.

धरमजयगढ़ के 91 जंगली हाथी घूम रहे है अलग अलग

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन दिनों धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र के ही 91 जंगली हाथियों का दल अलग-अलग समूहों में विचरण कर रहा हैं जिनमे नर हाथियों की संख्या 26, 41 मादा के अलावा 24 शावक शामिल है। धरमजयगढ़ के आमगांव में जहां 25 जंगली हाथी, इंचपारा में 22 जंगली हाथी के अलावा अलग-अलग रेंज में जंगली हाथियों की मौजदूगी है। हाथी प्रभावित गांवों में इन दिनों जंगली हाथियों का आतंक अधिक बढ़ गया है जिससे गांव के ग्रामीण भी दहशत में आ गए हैं।

रात होते ही पहुंच रहे गांव के रास्ते खेत

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि दिन के समय हाथियों का दल जंगल में रहता है और रात होने के बाद जंगल से निकल कर खेतों में आ रहे हैं। इसके बाद यहां अपने पैरों तले फसलों को रौंद रहे हैं। यह दल दोनों वन मंडल में विचरण कर रहा है। हांलाकि वन विभाग द्वारा लगातार उन पर नजर रख रहे हैं ताकि किसी प्रकार की कोई जनहानि न हो सके।

गजदल में नर मादा भी बच्चे शामिल

वनांचल क्षेत्र जंगलों से आच्छादित है यह जंगल उड़ीसा सीमा से लगा हुआ है यहां हाथियों का आवागमन आए दिन होते रहता है कई बार ग्रामीण इनकी चपेट में आकर जान भी गवां चुके हैं वही वन विभाग के मुताबिक हाथी जब अपने दल में बच्चे के साथ विचरण करते हैं तो वे काफी आक्रामक रहते। इस स्थिति परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीण जन भयभीत है और भय के माहौल में जीवन व्यतीत करें क्योंकि पूर्व में भी कई ग्रामीणों के घर को हाथियों द्वारा नस्तेनाबूत किया जा चुका है। जनहानि के साथ आर्थिक हानि हो चुकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
×

Powered by WhatsApp Chat

×