सारंगढ़

बारूद के ढेर में गुडेली,दिन दहाड़े हो रही ब्लास्टिंग

दहसत में ग्राम वासी नही होती कोई कार्रवाई

सारंगढ।।खनिज विभाग के अफसर और डोलोमाइट खदानों के संचालक आसपास जनता की सुरक्षा और नियम कायदों को दरकिनार कर ब्लास्टिंग करवा रहे हैं। इसके कारण आसपास के ग्रामीण परेशान हैं। ब्लास्टिंग के बाद हवा में तैर रहे पत्थर के टुकड़े कहर बनकर उनके घर, मकान की छतों पर गिर रहे हैं। इससे उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद कोई भी इनकी दिक्कत दूर करने का प्रयास नहीं कर रहा। ऐसा सालों से जारी है।

डमरुआ डॉट कॉम की टीम ने जब ग्रामीणों  से शिकायत मिलने के बाद गुडेली सहित अन्य गांवों में पहुंचकर स्थित का जायजा लिया। पाया कि खदान संचालकों ने ब्लास्टिंग का कोई समय निर्धारित नहीं किया है। ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर के टुकड़ें उनके घर और मकान की छतों पर बरसते हैं।इससे ग्रामीण दहसत में आ जाते है। टूटने-फूटने वाले सामान अंदर कर लिए जाते हैं। बाहर खेल रहे बच्चों को उनके अभिभावक चिल्लाते हुए बोलते हैं कि अंदर चले आओ नहीं तो चोट लग जाएगी। और फिर देखते ही देखते कर्फ्यू जैसा सन्नाटा छा जाता है। पांच बजे तक यह सन्नाटा छाया रहता है। उसके बाद लोग राहत की सांस लेते हैं और एक बार फिर से स्थिति सामान्य होती है। गौरतलब है गुडेली गांव के आसपास करीब 20 से अधिक खदानें चल रही हैं। जिसकी पुलिस और पंचायत स्तर पर शिकायत हुई है, पर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है।

गुडेली में अवैध खनन और ब्लास्टिंग को भला कौन रोके

 

गुडेली में ब्लास्टिंग का मामला यह पहला नही है ,यहां सालो से खदानों में ब्लास्टिंग किया जाता है गुडेली में वैध खदानों की संख्या नाम मात्र की होगी ।जबकि अवैध खदानों की संख्या सबसे ज्यादा है इन वैध खदानों की बात की जाए तो कोई एक दुक्का खादान संचालक ही है जो लीज वाले खादान से पत्थर निकालते है वही अवैध खादान की बात करे तो इसकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है ।जानकारों का ऐसा मानना है कि जिन क्रेशर संचालको ने लीज में खादान लेकर क्रेशर उद्योग चला रहे अधिकांश लोग महज रॉयल्टी निकलाने का काम करते है और वहीं पत्थरो का भंडारण बाहर से अवैध खरीदी करके विभागीय अधिकारियों को शो किया जाता है। अवैध खदानों से बहुतायत क्रेशर संचालक पत्थर लेकर अपनी दुकान दारी चला रहे है जिससे शासन को  लाखों के शासकीय राजश्व का नुकसान हो रहा है ।गुडेली में यह प्रथा पिछले कई सालों से चली आ रही है लेकिन इसपर रोक लागाने वाले जिम्मेदार कुम्भकर्णीय निद्रा में सो रहे है ।

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
×

Powered by WhatsApp Chat

×