सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के मुखिया कलेक्टर संजय कन्नौजे जहां एक ओर अपनी संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की नई मिसाल पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अधीनस्थ खनिज विभाग के आला अधिकारियों की “सुस्ती” चर्चा का विषय बनी हुई है। आलम यह है कि एक तरफ जिले का कप्तान सड़क पर उतरकर विकास कार्यों की समीक्षा कर रहा है, तो दूसरी तरफ जिले की आय का मुख्य स्रोत ‘खनिज विभाग’ पूरी तरह से कार्यालय तक सिमट कर रह गया है।
फील्ड पर ‘सुपर एक्टिव’ संजय कन्नौजे
कलेक्टर संजय कन्नौजे की कार्यशैली ने जिले में एक नई ऊर्जा भरी है। वे न केवल फाइलों का निपटारा कर रहे हैं, बल्कि समय-समय पर खुद फील्ड में उतरकर हर छोटे-बड़े विकास कार्यों का जायजा ले रहे हैं। हाल ही में जब अवैध रेत परिवहन की शिकायतें उन तक पहुंचीं, तो उनके कड़े निर्देश पर राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने 4 बड़े वाहनों को जब्त कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जनता के बीच कलेक्टर की छवि एक ‘एक्शन हीरो’ की तरह उभर रही है जो नियमों का उल्लंघन करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं कर रहे।
साल भर होने के बाद भी चेहरा “अनजान”
कलेक्टर की इस सक्रियता के विपरीत, खनिज विभाग के अधिकारी बजरंग पैकरा की निष्क्रियता अब स्थानीय जनप्रतिनिधि और जनता की नजरों में खटकने लगी है। बजरंग पैकरा को पदभार संभाले करीब साल भर होने वाला है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिले के अधिकांश लोगों ने उन्हें आज तक फील्ड में नहीं देखा। विपक्षी हो या सत्ताधारी दल, दोनों ही पक्षों के नेताओं का कहना है कि उन्होंने खनिज अधिकारी को कभी अवैध खनन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते नहीं देखा।
गुडेली और कटंगपाली में कार्रवाई ‘शून्य’, आखिर क्यों?
जिले के गुडेली और कटंगपाली जैसे बड़े खनिज क्षेत्र आज अवैध खनन की चपेट में हैं। मौके पर भारी मशीनें और डंपर बेखौफ चलते नजर आते हैं, लेकिन विभागीय फाइलों में सब कुछ “निरंक” बता दिया जाता है।
- जनता की राय: क्षेत्र के 10 में से 8 व्यक्ति यही कहेंगे कि अवैध खनन चरम पर है, लेकिन साहब को इससे कोई सरोकार नहीं।
- मीडिया की खबरें बेअसर: बीते डेढ़-दो महीनों से मीडिया लगातार अवैध खनन की खबरें उजागर कर रहा है, लेकिन बजरंग पैकरा ने इन खबरों को दरकिनार कर यह साबित कर दिया है कि वे अपनी कुर्सी से हिलना नहीं चाहते।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं:
क्या खनिज विभाग केवल कलेक्टर के निर्देश का इंतजार करता रहेगा? क्या गुडेली और कटंगपाली में हो रहे बड़े पैमाने पर उत्खनन की जानकारी साहब तक नहीं पहुंचती या वे जानकर भी अनजान बने हुए हैं?
जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी (कलेक्टर) फील्ड पर एक्टिव हो सकता है, तो खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा को आखिर एसी दफ्तरों से बाहर निकलने में क्या गुरेज है?