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रायगढ़ पुलिस की मर्दानगी गायब @ बॉर्डर पर गैंगवार, बंटी सहित सौ से ज़्यादा आरोपी बेखौफ !

रायगढ़ में वर्दी की ताकत अब अपराध की गंभीरता से नहीं, बल्कि आरोपी की हैसियत से तय होती नजर आ रही है। जहां कमजोर आरोपियों पर त्वरित कार्रवाई कर पुलिस अपनी मर्दानगी का प्रदर्शन करती है, वहीं 100 से अधिक हथियारबंद लोगों की गैंगवार के बाद भी बंटी डालमिया जैसे नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और सोशल मीडिया पर कानून को चुनौती दे रहे हैं। सीमा सील, बयान और जांच की रस्मअदायगी के बीच एक भी गिरफ्तारी न होना इस सवाल को जन्म दे रहा है कि रायगढ़ में कानून अपराधियों के सामने बौना हो गया है या फिर वर्दी किसी खास वर्ग के अहसानों तले दब चुकी है.Screenshot 2026 0119 111033

डमरूआ/रायगढ़।
हमीरपुर बॉर्डर पर दिनदहाड़े हुई हथियारबंद गैंगवार को कई दिन बीत जाने के बावजूद रायगढ़ पुलिस अब तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। लगभग 100 से 140 लोगों की संगठित भीड़, खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन, लूट, मारपीट और जान से मारने की धमकियों के बाद भी मुख्य आरोपी बंटी डालमिया उर्फ घनश्याम सहित कोई भी नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं है। ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा सील करने की कवायद जरूर दिखाई गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। यह स्थिति अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पुलिस की इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

गिरफ्तारी शून्य, सोशल मीडिया पर जश्न, गैंगवार के आरोपी की खुली चुनौती

गिरफ्तारी न होने के बीच बंटी डालमिया सोशल मीडिया पर अपने बच्चे का जन्मदिन मनाते हुए वीडियो और फोटो साझा कर रहा है। आरोपी का बेखौफ अंदाज यह साफ संदेश दे रहा है कि उसे न कानून का डर है और न ही रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई का। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन को दी जा रही खुली चुनौती है। गैंगवार जैसे संगीन अपराध के बाद भी आरोपी का सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहना आम नागरिकों में यह भावना पैदा कर रहा है कि अपराधियों के लिए कानून अब मजाक बनता जा रहा है।

जब चूड़ी परेड होती है, तब सौ गुंडों पर चुप्पी क्यों, पुलिस की चयनात्मक मर्दानगी पर सवाल

हाल ही में महिला आरक्षक से बदसलूकी के एक मामले में रायगढ़ पुलिस ने आरोपी को चूड़ी पहना कर परेड निकालते हुए अपनी मर्दानगी का प्रदर्शन किया था। उस कार्रवाई को पुलिस की सख्ती और त्वरित न्याय के उदाहरण के रूप में प्रचारित किया गया। लेकिन सवाल यह है कि जब 100 से अधिक हथियारबंद लोग गैंगवार करते हैं, गोलियों की नौबत आती है, लूट और गंभीर मारपीट होती है, तब रायगढ़ पुलिस की वही मर्दानगी आखिर कहां गायब हो जाती है। क्या यह साहस केवल कमजोर और अकेले आरोपियों तक सीमित है, और संगठित गिरोहों के सामने वर्दी की ताकत बिखर जाती है।

पुलिस-प्रशासन और डालमिया की नजदीकियां, क्या उतारा जा रहा है पुराने सहयोग का कर्ज

शहर में यह चर्चा अब आम हो चुकी है कि बंटी डालमिया का पुलिस और प्रशासन के साथ हमेशा से सहयोगात्मक व्यवहार का आदान-प्रदान रहा है। बताया जाता है कि चक्रधर समारोह जैसे बड़े सरकारी-सांस्कृतिक आयोजनों में बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए महंगी और लग्जरी गाड़ियों की व्यवस्था में भी डालमिया की भूमिका रही है। ऐसे में यह सवाल और गहराता जा रहा है कि क्या यही कथित एवं अन्य अदृश्य  सहयोग आज गिरफ्तारी में ढील का कारण बन रहा है। यदि ऐसा है तो यह कानून के समानता के सिद्धांत पर सीधा प्रहार है।

क्या है पूरा मामला

सुनियोजित गैंगवार, लूट और दहशत का खेल

घटना 18 जनवरी 2026 की शाम लगभग 4.45 से 5.00 बजे के बीच इंडियन ऑयल मिश्रा पेट्रोल पंप के पीछे स्थित यूनियन कार्यालय की है। आरोप है कि बंटी डालमिया उर्फ घनश्याम, गोकुल गोयका, धीरेंद्र प्रधान, विपिन अग्रवाल, धनी मित्रो, तेजराम सहित लगभग 100 से 140 अज्ञात लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। भीड़ के पास रिवॉल्वर, पिस्टल, तलवार, लाठी, हॉकी डंडे और ज्वलनशील पदार्थ थे। कार्यालय में घुसते ही लोगों को घेरकर सड़क पर घसीटा गया, बेरहमी से पीटा गया और आतंक का माहौल बनाया गया। इस हमले में शंकर अग्रवाल, प्रमाशंकर साही, सुभाष पांडेय, संजय अग्रवाल और सतीश कुमार चौबे गंभीर रूप से घायल हुए। आरोप है कि हमलावर चार टोकन और लगभग पंद्रह हजार रुपये नकद लूट कर ले गए।

हथियारों का खुला प्रदर्शन और बॉर्डर का दुरुपयोग,
संगठित अपराध का खतरनाक संकेत

इस वारदात का सबसे चिंताजनक पहलू 100 से अधिक लोगों द्वारा हथियारों का खुला और संगठित प्रदर्शन है। दूसरी ओर ओडिशा-छत्तीसगढ़ बॉर्डर का इस्तेमाल सेफ जोन की तरह किया गया। पुलिस वाहन के पहुंचने की आशंका होते ही आरोपी बॉर्डर की ओर जाकर खड़े हो गए, जिससे कानून प्रवर्तन की सीमाएं उजागर हो गईं। यह हमला किसी व्यक्तिगत विवाद पर नहीं, बल्कि वैधानिक यूनियन गतिविधियों पर किया गया, जो औद्योगिक शांति पर सीधा हमला है।

मिर्ची स्प्रे, फायरिंग और वसूली,
गैंग के दम पर चल रहा ट्रांसपोर्ट कारोबार

बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में मिर्ची स्प्रे का भी इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बंटी डालमिया अपने साथ मिर्ची स्प्रे लेकर पहुंचा था, जिसके बाद विवाद भड़का और मारपीट शुरू हो गई। गोलीबारी की नौबत तक आ गई और हथियार लहराए गए। पूर्व में भी ताबड़तोड़ फायरिंग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कॉल ट्रांसपोर्ट का कारोबार अब गैंग के दम पर संचालित किया जा रहा है, जहां रायगढ़ और ओडिशा के बीच वर्चस्व की खुली लड़ाई चल रही है।

औद्योगिक जिला रायगढ़ में गैंग कल्चर का जहर, कानून की साख दांव पर

औद्योगिक गतिविधियों, ठेकेदारी व्यवस्था और श्रमिक संगठनों के इर्द-गिर्द गैंग कल्चर तेजी से जड़ें जमा रहा है। यदि बंटी डालमिया जैसे आरोपियों पर समय रहते ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि रायगढ़ में गैंगवार करने वालों के लिए कानून केवल कागजों तक सीमित है। सीमा सील करना और बयान जारी करना काफी नहीं है। अब जरूरत है ऐसी कार्रवाई की, जो यह साबित कर सके कि रायगढ़ में वर्दी किसी के अहसान तले नहीं, बल्कि कानून के साथ खड़ी है।

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