लियारी में रहमान डकैत के किरदार से प्रभावित छोटे-मोटे गुंडे भी अब रहमान डकैत बनना चाहते हैं, कुछ इसी तर्ज पर रायगढ़ में भी गैंगवॉर के प्रदूषण का जहर घोला जा रहा है, ऐसे हालातो को देखकर वह दिन दूर नहीं दिखाई देता कि जब बॉर्डर पर हो रहे गैंगवॉर की तस्वीर शहर के भीतर दिखाइए दे.
डमरूआ/रायगढ़। जिले के तमनार थाना क्षेत्र अंतर्गत हेमीरपुर बॉर्डर पर दिनदहाड़े हथियारबंद गुंडागर्दी की एक बेहद गंभीर और खतरनाक वारदात सामने आई है, जिसने रायगढ़ की कानून व्यवस्था और सामाजिक वातावरण को सीधे तौर पर चुनौती दी है। यूनियन कार्यालय में चल रही वैधानिक बैठक के दौरान अचानक सैकड़ों की संख्या में पहुंचे हथियारों से लैस असामाजिक तत्वों ने चारों ओर से घेराबंदी कर अश्लील गालियां दीं, बेरहमी से मारपीट की, नकदी व टोकन लूटे और जान से मारने की धमकी देकर दहशत फैलाई। इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र नाम सामने आया है बंटी डालिया उर्फ घनश्याम, जिसकी गैंगवार शैली की गतिविधियां अब रायगढ़ के एटमॉस्फेयर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं।
घटना 18 जनवरी 2026 की शाम लगभग 4.45 से 5.00 बजे के बीच इंडियन ऑयल मिश्रा पेट्रोल पंप के पीछे स्थित यूनियन कार्यालय की है। आरोप है कि बंटी डालिया उर्फ घनश्याम, गोकुल गोयका, धीरेंद्र प्रधान, विपिन अग्रवाल, धनी मित्रो, तेजराम सहित लगभग 100 से 140 अज्ञात लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। भीड़ के पास रिवॉल्वर, पिस्टल, तलवार, लाठी, हॉकी डंडे और ज्वलनशील पदार्थ मौजूद थे। कार्यालय में घुसते ही हमलावरों ने लोगों को चारों ओर से घेर लिया, जबरन बाहर सड़क पर घसीटा, पटक पटक कर पीटा और भय का माहौल बना दिया।
इस हमले में शंकर अग्रवाल, प्रमाशंकर साही, सुभाष पांडेय, संजय अग्रवाल और सतीश कुमार चौबे को गंभीर चोटें आई हैं। आरोप है कि हमलावरों ने कार्यालय में रखे चार टोकन और लगभग पंद्रह हजार रुपये नकद भी जबरन लूट लिए। पुलिस वाहन के पहुंचने की आशंका होते ही हमलावरों ने दोबारा जान से मारने की धमकी दी और बॉर्डर की ओर लगभग एक किलोमीटर दूर जाकर खड़े हो गए, जिससे घटना की सुनियोजित गैंगवार प्रकृति उजागर होती है।
हथियारों का बेखौफ़ खुला प्रदर्शन
इस वारदात का सबसे गंभीर पहलू हथियारों का खुला और संगठित प्रदर्शन है, जहां 100 से अधिक लोगों की भीड़ रिवॉल्वर, पिस्टल, तलवार, लाठी, हॉकी डंडे और ज्वलनशील पदार्थों के साथ एकजुट होकर पहुंची, जो इसे सामान्य विवाद से उठाकर संगठित अपराध की श्रेणी में ले जाता है। दूसरी बड़ी फीडिंग सीमा क्षेत्र का दुरुपयोग है, जहां ओडिशा छत्तीसगढ़ बॉर्डर को अपराधियों ने सेफ जोन की तरह इस्तेमाल किया और पुलिस की मौजूदगी की आशंका होते ही उसी दिशा में जाकर खड़े हो गए, जिससे कानून प्रवर्तन की सीमाएं उजागर हुईं। तीसरा और सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत विवाद पर नहीं बल्कि वैधानिक यूनियन गतिविधियों पर किया गया, जिससे श्रमिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और औद्योगिक शांति पर सीधा प्रहार हुआ है।
किसे बताया जा रहा गैंग का सरगना
लोगों के बीच जो चर्चा है और तमनार थाने में जो शिकायत की गई है उसके मुताबिक गैंग का सरगना डालमिया को बताया जा रहा है, यदि हम इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं यह जांच का विषय हो सकता है. बहरहाल जो जानकारी प्राप्त हो रही है उसके मुताबिक इस पूरे घटना का मुख्य आरोपी घनश्याम उर्फ बंटी डालमिया है जिसकी पहचान यह है कि वह सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय गैंग लीडर के रूप में चर्चित है और इस प्रकार के गैंगवार में इसके द्वारा भीड़ जुटाकर हथियारों के दम पर दबाव बनाना, सीमा क्षेत्र का इस्तेमाल कर फरारी करने के रूप में चर्चित है. जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक इसके ऊपर विभिन्न राज्यों में आपराधिक मामलों की चर्चा, पूर्व में जेल यात्रा और कई प्रकरण विचाराधीन बताए जाते हैं। इसके ऊपर तमनार थाने में मामला दर्ज किया गया है रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिले में ऐसे व्यक्ति की सक्रियता सामाजिक शांति, व्यापारिक माहौल और श्रमिक संगठनों के लिए सीधा खतरा माना जा रहा है।
कानून व्यवस्था पर खतरे की घंटी
तमनार थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं 296, 351(3), 115(2), 118(1), 191(2), 191(3), 190, 310(2) के साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं 25 और 27 दर्ज की गई हैं। यह स्पष्ट करता है कि मामला साधारण विवाद नहीं बल्कि संगठित हिंसा, लूट और सार्वजनिक शांति भंग करने से जुड़ा है। यदि बंटी डालिया जैसे गैंग सक्रिय रहे तो रायगढ़ का एटमॉस्फेयर और अधिक अस्थिर हो सकता है, जिससे आम नागरिकों में डर और असुरक्षा बढ़ना तय है।
पुलिस की चुप्पी पर बड़े सवाल
इतनी बड़ी वारदात, सैकड़ों की भीड़, अत्याधुनिक हथियार और सीमा का खुला इस्तेमाल होने के बावजूद पुलिस की तत्पर कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के समय और बाद में आरोपियों का सीमा क्षेत्र में आराम से खड़े रहना यह दर्शाता है कि अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं है। स्थानीय लोगों और संगठनों में यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो गैंगवार की यह आग रायगढ़ के औद्योगिक और सामाजिक ढांचे को झुलसा सकती है। अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस चुनौती को कितनी गंभीरता से लेता है।
बॉर्डर क्राइम का खतरनाक पैटर्न
रायगढ़ और ओडिशा की सीमाएं लंबे समय से अपराधियों के लिए सुरक्षित रास्ता बनती जा रही हैं। सीमावर्ती इलाकों में अलग-अलग राज्यों की पुलिस व्यवस्था का लाभ उठाकर गैंग सक्रिय रहते हैं और वारदात के बाद सीमा पार कर जाना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। हेमीरपुर बॉर्डर की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक अंतरराज्यीय समन्वय मजबूत नहीं होगा, तब तक ऐसे संगठित अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। बॉर्डर क्राइम अब स्थानीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
भाड़ा और अवैध वसूली विवाद संजय अग्रवाल, सतीश चौबे, प्रभा, आशीष यादव और सुभाष की पिटाई
जो जानकारी निकाल कर सामने आ रही है उसके मुताबिक बीजेएमएस यूनियन द्वारा छत्तीसगढ़ की गाड़ियों को समझौते से कम लोडिंग देने व प्रति वाहन 4 सौ रूपए लिये जाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच इस कदर तकरार बढ़ी कि ओड़िशा के ट्रांसपोर्टरों ने रायगढ़ के कुछ ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के साथ मारपीट करते हुए उन्हें बंधक बनाने का प्रयास भी किया। इस बात की जानकारी मिलने पर रायगढ़ से अन्य गाड़ी मालिक भी वहां पहुंचे तथा पुलिस को घटना की सूचना दी। तमनार से पुलिस टीम ने मौके पर पहुंच कर ओडिशा के ट्रांसपोर्टरों के कब्जे से रायगढ़ के ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को छुड़वा कर अपने साथ थाने ले आई।
काफी पहले से चल रहा है छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के ट्रांसपोर्टस का विवाद
ओड़िसा की खदानों से रायगढ़ के उद्योगों ने कोल परिवहन का कार्य रायगढ़ के अलावा ओड़िशा के ट्रांसपोर्टर भी करते हैं। पूर्व में ओड़िशा में रायगढ़ के ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों को रोक देने व बराबर लोडिंग न देने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद रायगढ़ के ट्रांसपोर्टरों ने अपनी गाड़ियों के लिए 40 प्रतिशत लोडिंग की मांग रखते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा में धरना प्रदर्शन करते हुए ओड़िशा की गाड़ियों को भी छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने से रोक दिया था। रविवार की शाम को रायगढ़ से ट्रांसपोर्ट व्यवसायी संजय अग्रवाल, सतीश चौबे, प्रभा शाही, शंकर अग्रवाल, आशीष यादव सहित अन्य ट्रांसपोर्टर ओड़िशा गये थे जहां समझौते के अनुसार छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टरों को 33 प्रतिशत लोडिंग नहीं दिये जाने तथा ओड़िशा यूनियन द्वारा 4 सौ रूपए प्रति गाड़ी लिये जाने की बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। रायगढ़ के ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि यदि ओड़िशा में 4 सौ रूपए लिया जाता है तो छत्तीसगढ़ में भी ओड़िशा की गाड़िय से राशि ली जाएगी। दोनों मुद्दों को लेकर चल रही टपरिया बार्डर पर बहस ने उस वक्त आक्रामक रूप ले लिया, जब गोपाला धीरेन्द्र, विपिन, धनी, तेजराम और 100 स अधिक लोग शंकर अग्रवाल के साथ झूमा झटकी करने लगे ।
एक हथियार मिर्ची पाउडर भी….
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में मिर्ची स्प्रे की भूमिका भी अहम् थी, आशीष यादव की अवैध वसूली का मुद्दा भी काफी गहराया बताया यह जा रहा है कि बंटी डालमिया अपने साथ मिर्ची स्प्रे लेकर गया था जब विवाद हुआ तो उसने मिर्ची स्प्रे किया इसके बाद मामला भड़क गया और मारपीट शुरू हो गई साथ ही गोलीबारी की नौबत भी आ गई हथियार लहराए जाने लगे. पूर्व की एक घटना में ताबड़तोड़ फायरिंग भी हो चुकी है. कॉल ट्रांसपोर्ट का व्यापार अब गैंग के दम पर संचालित किया जा रहा है दोनों ही ओर से वर्चस्व की लड़ाई स्पष्ट दिखाई दे रही है, एक पक्ष रायगढ़ में दबदबा काम करना चाहता है तो दूसरा उड़ीसा में, इन सब का परिणाम यह है कि रायगढ़ को औद्योगिक प्रदूषण के साथ-साथ गैगवार का प्रदूषण भी झेलना पड़ रहा है.
औद्योगिक जिला रायगढ़ में गैंग कल्चर की बढ़ती जड़ें
औद्योगिक गतिविधियों, ठेकेदारी व्यवस्था और श्रमिक संगठनों के इर्द-गिर्द धीरे-धीरे गैंग कल्चर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है। दबदबा बनाने, वसूली और वर्चस्व की लड़ाई में हथियारों का इस्तेमाल अब अपवाद नहीं रह गया है। बंटी डालिया जैसे नामों का उभरना इस बात का संकेत है कि संगठित गिरोह स्थानीय विवादों को गैंगवार में बदलने की क्षमता हासिल कर चुके हैं। यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते रोक नहीं लगी तो रायगढ़ का सामाजिक संतुलन और औद्योगिक शांति गंभीर खतरे में पड़ सकती है।