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बरमूडा में खुलेआम जुआ: ‘खुड़खुड़िया’ बना ‘खुले संरक्षण’ का प्रतीक, पुलिस और जनप्रतिनिधि बने मूकदर्शक

तमनार, रायगढ़ – तमनार ब्लॉक के बरमूडा गांव में इन दिनों “खुड़खुड़िया” नामक जुआ कार्यक्रमों की श्रृंखला चल रही है, जो अब मनोरंजन का नाम लेकर गाढ़ी कमाई को निगलने वाला ‘धंधा’ बन चुका है। यह जुआ अब कोई छिपा-छिपा खेल नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय खाकी वर्दीधारियों के परोक्ष संरक्षण में एक खुले मंच पर  आयोजन की शक्ल में बदस्तूर जारी है।

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ग्रामीणों की मानें तो “खुड़खुड़िया” अब केवल शाम की चुपचाप हलचल नहीं, बल्कि पूरे गांव का अंधकारमय भविष्य बन चुका है। युवाओं की मेहनत की कमाई चंद मिनटों में दांव पर लगाई जा रही है और परिणामस्वरूप कई घरों में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। खास बात यह है कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस खेल के खिलाड़ियों का हिस्सा बने हुए हैं.

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इस अवैध गतिविधि के संबंध में स्थानीय पुलिस को कई बार जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चुप्पी और अनदेखी का व्यवहार देखने को मिल रहा है। यह रवैया अब संदेह के घेरे में है — क्या पुलिस की चुप्पी मात्र अक्षमता है या फिर मिलीभगत?

 क्या कह रहे हैं पुलिस के अधिकारी

इस संबंध में हमारी चर्चा तमनार पुलिस थाना की प्रभारी अधिकारी से हुई जिस पर उन्होंने कहा कि वह तुरंत इस अवैध धंधे को बंद करने के लिए पुलिस की टीम रवाना कर रही है लेकिन देर रात तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी शायद खेल खत्म होने के बाद पुलिस अपनी औपचारिकता पूरी करें.

जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी कम सवालों के घेरे में नहीं है। जब युवा पीढ़ी जुए की लत में डूब रही है और गांव की सामाजिक स्थिति बिगड़ रही है, तब उनके द्वारा कोई ठोस पहल न किया जाना, कई सवाल खड़े करता है।

जनता पूछ रही है —

  • क्या जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल वोट मांगने तक सीमित है?
  • क्या पुलिस का काम सिर्फ बड़े आयोजनों में सुरक्षा देना और आम जन की समस्याओं को अनदेखा करना है?

“खुड़खुड़िया” एक जुआ मात्र नहीं, एक सामाजिक जहर बन चुका है, जिसकी रोकथाम में प्रशासन और राजनैतिक नेतृत्व दोनों की असफलता चिंता का विषय है।

इस खबर के माध्यम से आम जनमानस यह अपील कर रहा है कि इस अवैध गतिविधि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, और ग्रामीण क्षेत्र की युवा पीढ़ी को इस दलदल से बचाया जाए।

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