आरोप नहीं, साक्ष्य चाहिए — शासनादेश के तहत आवंटित भूमि को अवैध बताने का प्रयास, जीवनलाल यादव के विरुद्ध भ्रामक प्रचार पर उठे
“मरवाही में सच्चाई को रौंदने की साजिश — जीवनलाल यादव को बदनाम करने का पूर्वनियोजित षड्यंत्र उजागर!”
मरवाही (जीपीएम):
शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 श्री जीवनलाल यादव के खिलाफ हाल ही में कुछ माध्यमों से फैलाई जा रही अफवाहें न केवल निराधार हैं, बल्कि एक ईमानदार, कर्मठ और अनुशासित कर्मचारी की छवि धूमिल करने का सोचा-समझा प्रयास प्रतीत होती हैं। तथ्यों की उपेक्षा कर, भावनाओं के सहारे भ्रामक बातें फैलाना न तो पत्रकारिता है, न ही सामाजिक जिम्मेदारी का परिचायक।
भूमि का मूल आवंटन — जीवनलाल यादव नहीं, उनके पिता को वैधानिक रूप से मिला था
जिस भूमि (खसरा नं. 214/5 एवं अन्य) को लेकर सबसे अधिक प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं, उसका आवंटन श्री जीवनलाल यादव के पिता, स्वर्गीय श्री चंदूलाल यादव को शासन के 20 सूत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत विधिवत प्रक्रिया से किया गया था। यह नीतिगत प्रयास शासन द्वारा निर्धन व पात्र नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु किया गया था।
जांच में सच्चाई सामने आई — कोई गड़बड़ी नहीं
उक्त भूमि मामले को लेकर पूर्व में शिकायत की गई थी, जिसकी तहसील एवं जिला प्रशासन द्वारा गहराई से जांच की गई। जांच में यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हुआ कि आवंटन नियमों और शासन के दिशानिर्देशों के अंतर्गत पूर्णतः वैध था। न कोई फर्जीवाड़ा हुआ, न कोई अनियमितता पाई गई।
न्यायालय में भी सत्य की जीत हुई
इस प्रकरण को न्यायालय तक ले जाने का प्रयास भी किया गया। किंतु जब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर मामले की विवेचना हुई, तो आरोप टिक नहीं पाए। किसी भी स्तर पर श्री जीवनलाल यादव के विरुद्ध कोई दंडात्मक आदेश जारी नहीं हुआ।
कमिशनखोरी के आरोप — न कोई शिकायत, न कोई प्रमाण
यह दावा करना कि कार्यालयीन कार्यों में ‘कमिशन’ लिया जाता है, सरासर झूठ है। न तो ऐसी कोई लिखित शिकायत कभी सामने आई, न किसी जाँच में यह सिद्ध हुआ। ऐसे आरोप सिर्फ व्यक्ति की प्रतिष्ठा को आघात पहुँचाने के लिए गढ़े जाते हैं और मानहानि के योग्य हैं।
मेहनत की कमाई से खड़ा किया साम्राज्य — जीवनलाल यादव की सच्ची सफलता की कहानी
श्री यादव ने अपने जीवन की 30-40 वर्षों की सेवा में जिस प्रकार निरंतर परिश्रम और अनुशासन के साथ कार्य किया, उसी का परिणाम है कि उन्होंने अपने संसाधनों और मेहनत से जो कुछ भी खड़ा किया, वह उनकी ईमानदारी और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। न कोई अवैध निर्माण, न किसी योजना का दुरुपयोग — केवल परिश्रम, प्रतिबद्धता और सच्चे सेवाभाव का परिणाम है उनका वर्तमान जीवन।
रिश्तेदारों का बसना — यदि पात्र हैं तो यह योजना का लाभ, न कि अपराध
शासन की योजनाओं के अंतर्गत यदि जीवनलाल यादव के रिश्तेदार भी पात्रता रखते हैं और नियमानुसार उन्हें लाभ मिला है, तो उसे ‘भ्रष्टाचार’ कहना योजना और उसके उद्देश्यों का अपमान है। पात्र को लाभ देना ही तो नीति की आत्मा है।
जनता की आवाज — झूठ की नहीं, सच की हो जीत
मरवाही की जनता अब जानती है कि जीवनलाल यादव को बदनाम करने का यह षड्यंत्र किस ओर से और किस मकसद से रचा जा रहा है। जनता की अपेक्षा है कि प्रशासन तथ्यों को सामने लाए और इस प्रकार की झूठी एवं सस्ती प्रचारबाजी पर कठोर अंकुश लगाए।