Sarangarh Desk।।सारंगढ़ जिले के ग्राम टीमरलगा में अवैध खनन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सूरज होटल के पीछे बड़े पैमाने पर पोकलेन और जेसीबी मशीनों से खुदाई की जा रही है, जिससे बड़ी मात्रा में पत्थर निकाला जा रहा है। यही नहीं, इन खनिजों को ट्रैक्टर और हाईवा वाहनों के जरिए धड़ल्ले से परिवहन किया जा रहा है। इस पूरे मामले की जानकारी माइनिंग विभाग को दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगा पाएगा या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
टीमरलगा में क्यों हो रहा है अवैध खनन?
सारंगढ़ जिले का टीमरलगा गांव खनिज संपदा से भरपूर है। यहां की जमीन में उच्च गुणवत्ता वाले पत्थर पाए जाते हैं, जिनका उपयोग निर्माण कार्यों और अन्य व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इसी कारण खनन माफिया इस क्षेत्र को अपना निशाना बना रहे हैं।
बिना किसी वैध अनुमति के बड़े स्तर पर खुदाई हो रही है।
आधुनिक मशीनों पोकलेन और जेसीबी का उपयोग कर तेजी से पत्थर निकाले जा रहे हैं।
निकाले गए पत्थरों को ट्रैक्टर और हाईवा की मदद से अन्य जिलों में भेजा जा रहा है।
यह सारा खेल प्रशासन की निगाहों के सामने चल रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रशासन की चुप्पी, माफिया की बढ़ती हिम्मत
इस अवैध खनन को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार विरोध जताया है और माइनिंग विभाग को भी सूचित किया गया है, लेकिन अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
संभावित कारण:
1. प्रभावशाली माफियाओं का संरक्षण: बड़े स्तर पर हो रहे इस अवैध खनन के पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ हो सकता है।
2. प्रशासन की उदासीनता: जब तक प्रशासनिक अधिकारी कड़ी कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक यह खेल यूं ही जारी रहेगा।
3. प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान: इस प्रकार की खुदाई से न केवल प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि भूगर्भीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा है।
कानून और अवैध खनन
भारतीय कानून के अनुसार, बिना लाइसेंस के खनन करना अपराध है।
खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बिना अनुमति खनन करने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम, 1986 के अनुसार, खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, बिना लाइसेंस खनिजों का परिवहन भी अवैध माना जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या टीमरलगा में हो रहे इस अवैध खनन पर प्रशासन कानून के अनुसार कोई कार्रवाई करेगा?
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
अब जब इस अवैध खनन की शिकायत माइनिंग विभाग तक पहुंच चुकी है, तो देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। क्या दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी? क्या पोकलेन और जेसीबी मशीनों को जब्त किया जाएगा? या फिर मामला दबाकर इस गोरखधंधे को जारी रखा जाएगा?
फिलहाल, टीमरलगा में अवैध खनन का मुद्दा चर्चा में है और स्थानीय लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि कानून का डंडा कब चलेगा और कब तक इस अवैध कारोबार पर विराम लगेगा।