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खनिज माफियाओ की दादागिरी! कलेक्टर और खनिज विभाग क्यों हैं खामोश?

खनिज

Sarangarh News।सारंगढ़ जिले के गुडेली और टीमरलगा क्षेत्र में चुना पत्थर (लाइम स्टोन) जैसे खनिज संपदा का अवैध खनन बड़े पैमाने पर चल रहा है। यह खनन न केवल पर्यावरण को बर्बाद कर रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी खाली कर रहा है। लेकिन खनिज विभाग और प्रशासन की चुप्पी से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सवाल उठता है, क्या ये चुप्पी डर है, या साठगांठ का नतीजा?

 

खनिज विभाग: जिम्मेदारी या बेपरवाही?

खनिज विभाग का काम अवैध खनन पर रोक लगाना और दोषियों पर कार्रवाई करना है। लेकिन गुडेली और टीमरलगा में हो रही लूट पर विभाग की आंखें बंद हैं। क्या ये लापरवाही है, या जानबूझकर माफियाओं को बचाने की कोशिश?

 

अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे होते, तो आज हालात इतने बुरे नहीं होते। लेकिन यहां तो सवाल खड़ा होता है—क्या विभाग माफियाओं के साथ मिलकर जनता के अधिकारों की लूट में शामिल है?

 

कलेक्टर मौन

जिला कलेक्टर को जिले की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन इस मामले में उनका रवैया भी सवालों के घेरे में है। क्या कलेक्टर को इस अवैध खनन की जानकारी नहीं है, या फिर वे जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं? उनकी चुप्पी ने प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

माफियाओं का खौफ और ग्रामीणों की बेबसी

गुडेली और टीमरलगा के ग्रामीण खनिज माफियाओं के डर से चुप हैं। माफियाओं की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत कोई नहीं करता। प्रशासन और खनिज विभाग की निष्क्रियता ने माफियाओं को और मजबूत बना दिया है।ये माफिया इतने मजबूत हो गए जिनके आगे प्रशासन और खनिज विभाग भी नतमस्तक नजर आ रहा है ।

 

खनिज मंत्री और मुख्यमंत्री से अब आखरी उम्मीद

यह मामला अब खनिज मंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक पहुंचाना बेहद जरूरी हो गया है। राज्य के संसाधनों की इस खुली लूट पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे इस मामले की जांच करवाकर दोषियों को सख्त सजा दिलाएं।अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला न केवल सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए कलंक बन जाएगा।

 

जनता से अपील: आवाज उठाएं

यह सिर्फ गुडेली और टीमरलगा के लोगों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे जिले का मुद्दा है। खनिज विभाग और प्रशासन को जवाबदेह बनाने के लिए अब जनता को सामने आना होगा। सामाजिक संगठन, और हर जागरूक नागरिक को एकजुट होकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।

 

 खनिज विभाग और प्रशासन का पर्दाफाश जरूरी

खनिज विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी ने माफियाओं को खुला मैदान दे दिया है। अगर यह खेल ऐसे ही चलता रहा, तो पर्यावरण और सरकार दोनों को भारी नुकसान होगा।अब सवाल है—क्या खनिज विभाग और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, या माफियाओं को यूं ही लूट मचाने देंगे?

 

यह फैसला अब जनता और सरकार के हाथों में है। कार्रवाई होगी तो माफियाओं पर लगाम लगेगी, वरना जिले का भविष्य खतरे में है।

 

 

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