पलांदूर, छत्तीसगढ़: किसान की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। जितेंद्र यादव, पलांदूर गांव के निवासी, ने बताया कि उन्हें 2,65,000 रुपए का कर्ज दिखाया गया है, जबकि उनके पास केवल दो एकड़ ज़मीन है, जिस पर अधिकतम 60,000 रुपए का लोन मिलना चाहिए था।
उन्होंने सांसद, कलेक्टर और एसडीएम से कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिला। अब तो ऐसा लग रहा है कि उन्हें आत्महत्या का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
यह केवल जितेंद्र की कहानी नहीं है, बल्कि यादव राम वर्मा, राजकुमार वर्मा, शेखर वर्मा, और प्रदीप वर्मा जैसे कई अन्य किसानों के साथ भी ऐसा ही हुआ है। इन सभी ने न तो कभी लोन के लिए आवेदन किया और न ही उन्हें इस बारे में कोई जानकारी दी गई।
धोखाधड़ी की शुरुआत तब हुई, जब सोसायटी के प्रबंधक ने किसानों से नवीनीकरण के नाम पर खाली चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद, बैंक के कर्मचारियों के साथ मिलकर उनके नाम पर लोन मंजूर करवा लिया और पैसे हड़प लिए। जब किसानों को इस धोखे का पता चला, तब तक उनकी धान बेचने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो चुकी थी।
किसानों का कहना है कि बैंक और सोसायटी ने उनकी मेहनत की कमाई को लूट लिया। अब उन्हें मंडी में फसल बेचने की भी इजाजत नहीं मिल रही। उनका कहना है कि अगर वे धान बेचते हैं, तो जो राशि मिलेगी, वह सीधे बैंक के कर्ज में काट ली जाएगी।