सरिया थाना क्षेत्र के बहुचर्चित पॉक्सो मामलों में मिली सजा-ए-उम्रकैद, आज मिला सम्मान सांसद-कलेक्टर-एसपी ने बांधा प्रशस्ति पत्र
सारंगढ़।न्याय की लड़ाई में कभी-कभी एक ईमानदार जांच अधिकारी की मेहनत ऐसा रंग लाती है कि पूरा सिस्टम गर्व से झूम उठता है। ऐसा ही एक उदाहरण आज स्वतंत्रता दिवस समारोह में देखने को मिला, जब सारंगढ़ जिला मुख्यालय में कोतवाली थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ प्रमोद यादव को उनकी उत्कृष्ट विवेचना के लिए सार्वजनिक मंच से सम्मानित किया गया।

तीन मामले, तीन सख्त सजाएं विवेचना बनी मिसाल
बात उस दौर की है जब प्रमोद यादव सरिया थाना क्षेत्र में थाना प्रभारी के तौर पर तैनात थे। इसी दौरान क्षेत्र के ग्राम बार जटियापाली और भीखमपुरा में पॉक्सो एक्ट के तहत तीन गंभीर मामले दर्ज हुए थे। मामलों की नजाकत को समझते हुए उन्होंने साक्ष्य संकलन से लेकर पैरवी तक हर कदम पर बारीकी बरती और नतीजा रहा ऐतिहासिक: एक आरोपी को आजीवन कारावास और शेष दो मामलों में दो आरोपियों को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा माननीय न्यायालय ने सुनाई। पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में सजा की यह दर किसी भी विवेचना अधिकारी के कौशल का प्रमाण मानी जाती है।
मंच से मिला मान, तालियों से गूंजा समारोह
आज आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में क्षेत्रीय सांसद राधेश्याम राठिया के मुख्य आतिथ्य में, जिला कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू, पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा और अन्य गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में प्रमोद यादव को प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, समारोह स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कोतवाली में भी अपराध पर करारा प्रहार
सम्मान की यह कहानी यहीं नहीं रुकती। वर्तमान पदस्थापना यानी कोतवाली थाना क्षेत्र में भी प्रमोद यादव अपनी सख्त और सक्रिय कार्यशैली के लिए सुर्खियों में हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने अवैध शराब, जुआ-सट्टा और जरायमपेशा अपराधों के खिलाफ लगातार अभियान छेड़ रखा है, जिसका असर अब साफ नजर आने लगा है — पूरे क्षेत्र में अपराधों पर लगाम कसी है और आमजन का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर और मजबूत हुआ है।
यह सम्मान सिर्फ एक अधिकारी का नहीं, पूरी वर्दी का गौरव है
निःसंदेह आज मिला यह सम्मान प्रमोद यादव की व्यक्तिगत कर्मठता का ही परिणाम नहीं, बल्कि पुलिस वर्दी की साख और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की समूची पुलिस व्यवस्था के लिए गर्व का पल है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता साथ चलें, तो न पीड़ित को न्याय मिलने में देर लगती है, न समाज का विश्वास डगमगाता है।





