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26 साल बाद एक स्थान पर जुटे संत जोसेफ स्कूल जयरामनगर के विद्यार्थी, हसी-ठहाकों के बीच पुराने दिनों को किया याद

डमरुआ न्युज/बिलासपुर। ‘मान लो तो हार है और ठान लो तो जीत’। जब ठान कर किसी काम में जुटा जाए तो सफलता हर हाल में मिलती है। इस आदर्श वाक्य को बखूबी साबित किया है संत जोसेफ उच्चतर माध्यमिक शाला जयरामनगर के विद्यार्थियों ने। लक्ष्य था सभी सहपाठियों को एक मंच पर लाना। 1997 में कक्षा 12वीं की परीक्षा के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय सहपाठियों से संपर्क करना आसान नहीं था। कुछ ने 12वीं की परीक्षा पास कर व्यवसायिक पाठ्यक्रम को चुना तो कुछ शैक्षणिक मार्ग में ही आगे बढ़ते गए, किसी ने खेती-किसानी को अपना लिया तो कुछ राजनीति में दांव-पेंच दिखाने लगे। आज यहां के कई छात्र डाक्टर, इंजीनियर, विज्ञानी, व्याख्याता, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी, सेना के जवान और उन्नत किसान है। सबकी अपने-अपने कार्य क्षेत्र विशेषज्ञता और पहचान है। इसके बाद भी सभी को एक मंच पर लाना आसान नहीं था। कुछ स्थानीय स्तर पर देश और समाज की सेवा की सेवा कर रहे हैं तो कई गुड़गांव, दिल्ली, पुणे, कोलकाता और बेंगलूरू में सेवाएं दे रहे हैं। इन सबको एक मंच पर लाने में महती भूमिका निभाई इंटरनेट मीडिया ने। जो लोग फेसबुक, एक्स या इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय इंटरनेट मीडिया में सक्रिय है उनसे तो संपर्क हो गया, परंतु असली चुनौती थी उन लोगों तक सूचना पहुंचाना जो इन माध्यमों में सक्रिय नहीं है या कम सक्रिय है। बहरहाल कुछ छात्रों ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। सभी अपने-अपने काम और जिम्मेदारियों के निर्वहन में व्यस्त हैं। काफी सोंच-विचार के बाद आपसी सहमति से चार फरवरी को पूर्व छात्रों के सम्मिलन की तिथि और स्थान निर्धारित की गई। इसके बाद

उन लोगों तक पहुंचने का अभियान चलाया गया जो किसी के संपर्क में नहीं है, इसके लिए स्कूल के वरिष्ठ व कनिष्ठ छात्र-छात्राओं के साथ अध्यापकों से संपर्क किया गया, कई लोगों के लिए गांव तक की दौड़ लगाई गई। लगभग 15 दिनों के अथक प्रयासों के बाद कक्षा के 44 में से 42 सहपाठियों तक पहुंचा गया।

पहले से निर्धारित तिथि पर सभी बिलासपुर के मोपका स्थित होटल ग्रांड गुलमोहर में जुटे।

थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में आ रहे सहपाठियों से मिलने की खुशी और पुरानी बातों को याद कर ठहाकों का सिलसिला घंटों तक चला। खाने-पीने की औपचारिकता के बीच सबने अपनी हुनर का प्रदर्शन किया। शुरूआत शासकीय स्कूल रलिया की प्रधानपाठक मनीषा शर्मा के नृत्य से हुई। मनीषा ने छत्तीसगढ़िया गीत पर मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद लोगों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दिल्ली से आए बी इस्राइल की गिटार पर सदाबहार गीत ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे की शानदार प्रस्तुति के साथ पूर्व छात्रों के सम्मिलन का यह यादगार आयोजन संपन्न हुआ। आयोजन में सहभागी होकर सबने यह साबित किया कि जीवन में बचपन के दोस्तों की क्या अहमियत है। दवा व्यवसायी मनीष अग्रवाल ने सभी महिला सहपाठियों को छत्तीसगढ़ी जेवर …और पुरूष सहपाठियों को रूद्राक्ष की माला स्मृति चिंह स्वरूप उपहार भेंट किये।

कम समय के लिए ही सही पर इस खुशनुमा आयोजन में जुटे सभी सहपाठी अपने साथ मिठी यादें लेकर इस वादा और विश्वास के साथ लौटे कि जल्द ही फिर मिलेंगे। कार्यक्रम के आयोजन में ग्राम पंचायत जयरामनगर के उप सरपंच दयाशंकर राठौर, शिशुरोग विशेषज्ञ अनुराग ठाकुर, डाक्टर अब्दुल नईम खान, दवा व्यवसायी शशिकांत साहू, व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा, रेलवे सुरक्षा बल के प्रधान आरक्षक विजय कुमार चंद्रा के साथ नईदुनिया अखबार के वरिष्ठ उप संपादक योगेश्वर शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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