Damrua

Raigarh मे फर्जी लाइसेंस की फैक्ट्री पर शिकंजा: अमित अग्रवाल के बाबा ट्रैवल्स में पुलिस-आरटीओ की दबिश, 180 संदिग्ध लाइसेंस जांच के घेरे में…

ओडिशा समेत बाहरी राज्यों के लोगों को रायगढ़ का निवासी दिखाकर बनाए गए लाइसेंस, भारी वाहनों की स्टीयरिंग तक पहुंच गए नौसिखिया चालक

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डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के कथित संगठित खेल पर आखिरकार पुलिस और परिवहन विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों और सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच बाबा ट्रैवल्स नामक एजेंसी में पुलिस तथा आरटीओ की संयुक्त टीम ने दबिश देकर बड़ी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने न केवल लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह आशंका भी गहरा दी है कि भारी वाहनों की स्टीयरिंग ऐसे लोगों के हाथों में पहुंच गई थी जिन्हें वाहन संचालन का पर्याप्त अनुभव तक नहीं था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चल रही इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि 17 अप्रैल 2026 को आयोजित उस महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ी है जिसमें पुलिस, परिवहन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग तथा ट्रांसपोर्टरों के बीच सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने को लेकर समन्वित कार्रवाई का निर्णय लिया गया था। उसी रणनीति के तहत विभिन्न स्तरों पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया लगातार जारी थी।
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब 11 जून को पुलिस को लिखित शिकायत प्राप्त हुई कि रायगढ़ के अमित अग्रवाल द्वारा पुराना आरटीओ कार्यालय के बाजू में संचालित बाबा ट्रैवल्स के माध्यम से ओडिशा और अन्य राज्यों के निवासियों के लिए फर्जी एवं भ्रामक दस्तावेज तैयार कर उन्हें रायगढ़ का निवासी दर्शाया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि किरायानामा, शपथ-पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर ऐसे लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए गए जिनका वास्तविक निवास रायगढ़ नहीं था।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा और यातायात उप पुलिस अधीक्षक उत्तम प्रताप सिंह के नेतृत्व में आरटीओ तथा यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने बाबा ट्रैवल्स कार्यालय में दबिश दी। जांच के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेजों का परीक्षण किया गया, जिसमें कई आवेदकों के पते एक जैसे पाए गए। इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि सुनियोजित तरीके से बाहरी राज्यों के लोगों को रायगढ़ का निवासी दिखाकर लाइसेंस जारी कराने की प्रक्रिया संचालित की जा रही थी।
जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार कुछ मामलों में ड्राइविंग टेस्ट के दौरान वास्तविक आवेदक की जगह किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर परीक्षण दिलाए जाने की संभावना भी जांच के दायरे में है। यदि यह तथ्य प्रमाणित होता है तो यह केवल दस्तावेजी फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि संपूर्ण लाइसेंसिंग प्रक्रिया में गंभीर धोखाधड़ी का मामला माना जाएगा।
फिलहाल संयुक्त जांच टीम करीब 180 लाइसेंसधारियों के दस्तावेजों, निवास प्रमाणों, आवेदन पत्रों और लाइसेंस जारी करने से संबंधित अभिलेखों का सूक्ष्म सत्यापन कर रही है। प्रत्येक दस्तावेज की तस्दीक की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन परिस्थितियों में लाइसेंस जारी हुए और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था।

एक ही पते पर कई लाइसेंस, बढ़ी फर्जीवाड़े की आशंका

जांच के दौरान कई ऐसे आवेदन मिले हैं जिनमें अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा एक ही पते का उपयोग किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पतों का वास्तविक अस्तित्व क्या है और क्या इनका उपयोग केवल लाइसेंस बनवाने के लिए किया गया था। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह पूरे नेटवर्क के खुलासे की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

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हेवी वाहन चालकों की योग्यता पर भी उठे सवाल

पुलिस को पहले से सूचना मिल रही थी कि कुछ नवसीखिया चालक हेवी वाहन लाइसेंस का उपयोग कर भारी वाहनों का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में यह जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है बल्कि सड़क सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवहीन चालकों के हाथों में भारी वाहन पहुंचना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

फर्जी कोयला परिवहन विवादों से भी जुड़ चुका है नाम

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बाबा ट्रैवल्स का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है। बताया जाता है कि एजेंसी से जुड़े दो ट्रक पूर्व में घरघोड़ा क्षेत्र में कोयले की कथित अफरा-तफरी के मामले में पकड़े गए थे। हालांकि उस मामले की परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन वर्तमान जांच ने एजेंसी की गतिविधियों को लेकर फिर से कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद पुलिस और परिवहन विभाग किन लोगों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई करते हैं।

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