रायगढ़ में पर्यावरण पर एक और वार, शांभवी इस्पात विस्तार को लेकर जनाक्रोश तेज
जनसुनवाई से पहले ही उठे गंभीर सवाल, नियमों की अनदेखी और संदिग्ध ईआईए रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
डमरूआ न्यूज़ / रायगढ़. रायगढ़ जिले के ग्राम गेरवानी में प्रस्तावित शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के विस्तार प्रोजेक्ट को लेकर व्यापक विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ही क्षेत्र के हालात और पूर्व में स्थापित उद्योगों के प्रभाव को देखते हुए इस परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले से ही दर्जनों स्पंज आयरन और पावर प्लांट से जूझ रहे इस क्षेत्र में एक और बड़े विस्तार को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।
पर्यावरणीय नियमों के तहत जनसुनवाई की प्रक्रिया को लेकर भी संदेह की स्थिति बनी हुई है। निर्धारित समय सीमा के भीतर जनसुनवाई नहीं होने और लंबे अंतराल के बाद प्रक्रिया शुरू किए जाने से इसकी वैधता पर प्रश्न उठ रहे हैं। साथ ही प्रस्तुत ईआईए रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी और पुराने आंकड़ों के उपयोग ने पूरे प्रोजेक्ट को विवादों के घेरे में ला दिया है।
क्षेत्र में पहले से ही वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण के कारण जनजीवन प्रभावित है। कई गंभीर बीमारियों के मामले सामने आने के बावजूद इनके वैज्ञानिक आकलन और समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई है। प्रस्तावित विस्तार के बाद इन समस्याओं के और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जलस्रोतों, वन क्षेत्रों और स्थानीय आजीविका पर भी इस परियोजना के प्रभाव को लेकर स्पष्ट अध्ययन का अभाव दिखाई देता है। केलो डैम सहित अन्य जलाशयों पर संभावित प्रभाव का आकलन रिपोर्ट में नहीं किया गया है, जबकि क्षेत्र के हजारों लोग इन्हीं संसाधनों पर निर्भर हैं।
साथ ही यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता का अभाव देखा जा रहा है। स्थानीय रोजगार, महिलाओं की भागीदारी और बढ़ते अपराध जैसे सामाजिक पहलुओं को भी परियोजना दस्तावेजों में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।
नियमों पर सवाल, प्रक्रिया पर संदेह
जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि निर्धारित समयसीमा के भीतर इसे आयोजित नहीं किया गया। लंबे अंतराल के बाद आयोजित की जा रही जनसुनवाई नियमों के अनुरूप नहीं मानी जा रही है। साथ ही ईआईए रिपोर्ट में पुराने आंकड़ों का उपयोग और जमीनी सच्चाइयों की अनदेखी यह संकेत देती है कि दस्तावेजों की विश्वसनीयता संदिग्ध है।
बीमारियों और प्रदूषण का बढ़ता दायरा
गेरवानी और आसपास का क्षेत्र पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहा है, जहां वायु और जल प्रदूषण के कारण कई गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य परीक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन का अभाव बना हुआ है। ऐसे में नए विस्तार से स्थिति और अधिक गंभीर होने की आशंका है।
जल, जंगल और आजीविका पर खतरा
प्रस्तावित परियोजना से जलस्रोतों, वन क्षेत्रों और स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। केलो डैम और अन्य जलाशयों पर प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है, वहीं वन उपज पर निर्भर आदिवासी समुदाय के जीवन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
एक्सपर्ट व्यू – राजेश कुमार त्रिपाठी, जन चेतना रायगढ़
इस पूरे मामले पर जन चेतना रायगढ़ के राजेश कुमार त्रिपाठी का कहना है कि प्रस्तावित विस्तार परियोजना पर्यावरणीय और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से गंभीर खामियों से भरी हुई है। उनका मानना है कि जब तक क्षेत्र का समग्र और वास्तविक पर्यावरणीय अध्ययन नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार की नई औद्योगिक अनुमति या विस्तार को मंजूरी देना जनहित के खिलाफ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान ईआईए रिपोर्ट जमीनी सच्चाई से दूर है और इसमें महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।