शांभवी इस्पात विस्तार पर विरोध की आवाज तेज, समर्थन के नाम पर जुटाई जा रही भीड़ पर उठे सवाल
डमरूआ न्यूज़ / रायगढ़।
तमनार में प्रस्तावित शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के स्टील प्लांट विस्तार को लेकर होने वाली जनसुनवाई अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया कम और सुनियोजित प्रबंधन का प्रदर्शन ज्यादा नजर आने लगी है। 21 अप्रैल 2026 की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि यहां जनता की सुनवाई कम, बल्कि माहौल को अपने पक्ष में दिखाने की तैयारी ज्यादा जोर-शोर से चल रही है।
गांव-गांव में बैठकों का दौर जरूर चल रहा है, लेकिन इन बैठकों में उठ रही असली चिंताओं से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जनसुनवाई के दिन किस तरफ कितनी भीड़ दिखाई जाएगी। स्थानीय लोगों का साफ आरोप है कि पहले की तरह इस बार भी समर्थन के नाम पर भीड़ जुटाने की कवायद शुरू हो चुकी है, ताकि कागजों में “जनसमर्थन” दिखाया जा सके और विरोध की असली आवाज शोर में दब जाए।
तमनार और आसपास के गांव पहले ही उद्योगों की मार से कराह रहे हैं। हवा में जहर घुल चुका है, पानी पीने लायक नहीं बचा और खेत धीरे-धीरे बंजर होते जा रहे हैं, लेकिन कागजों में विकास की गाथा लिखी जा रही है। सवाल यह है कि जब सांस लेना मुश्किल हो रहा है, तब और धुआं उगलने वाले प्लांट की जरूरत किसे है और किसके लिए है।
प्रशासन इस बार “पारदर्शी जनसुनवाई” का भरोसा जरूर दे रहा है, लेकिन यही शब्द अब लोगों के बीच मजाक का विषय बन चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सब कुछ पारदर्शी है तो फिर हर बार विरोध की आवाजें क्यों दब जाती हैं और समर्थन ही क्यों उभर कर सामने आता है। क्या यह संयोग है या पहले से तय स्क्रिप्ट का हिस्सा।
पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी उठाने वाले तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ नियमों की बात होती है, दूसरी तरफ उन्हीं नियमों के नाम पर औपचारिकताएं पूरी कर परियोजनाओं को हरी झंडी देने का रास्ता तैयार किया जाता है। जनसुनवाई, जो आम लोगों की आवाज बनने का माध्यम होना चाहिए, वह अब औद्योगिक विस्तार का वैधता प्रमाणपत्र बनती जा रही है।
इस बीच कुछ स्थानीय समूहों ने इस बार जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने और हर गतिविधि को रिकॉर्ड करने की तैयारी की है, ताकि बाद में कोई यह न कह सके कि सब कुछ “शांतिपूर्ण और सर्वसम्मति” से हो गया।
तमनार में माहौल साफ संकेत दे रहा है कि इस बार मामला सिर्फ एक परियोजना का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसमें विकास के नाम पर लोगों की सांस और जमीन दोनों दांव पर लगाई जा रही हैं। अब देखना यह है कि 21 अप्रैल को जनसुनवाई में जनता बोलेगी या फिर वही होगा जो हर बार होता आया है — तय पटकथा, तय परिणाम और बाद में जारी एक और “संतोषजनक” रिपोर्ट।
फैक्ट फाइल
शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड – प्रस्तावित विस्तार (तमनार, रायगढ़)
परियोजना का प्रकार
इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट का विस्तार, जिसमें स्पंज आयरन, पावर उत्पादन, फेरो एलॉय और सहायक इकाइयों की क्षमता वृद्धि शामिल
स्थान
ग्राम तमनार, तहसील तमनार, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़
जनसुनवाई
तारीख: 21 अप्रैल 2026
समय: सुबह 11 बजे
स्थान: ग्राम तमनार
प्रमुख प्रस्तावित विस्तार
स्पंज आयरन (DRI किल्न)
2 इकाइयां, प्रत्येक 350 टन प्रतिदिन क्षमता
कुल अतिरिक्त उत्पादन क्षमता: 700 टन प्रतिदिन
पावर प्लांट (कैप्टिव पावर)
2 इकाइयां, प्रत्येक 10 मेगावाट
कुल क्षमता: 20 मेगावाट
एफबीसी पावर प्लांट
1 इकाई, 10 मेगावाट क्षमता
लो-ग्रेड कोयले/अपशिष्ट ईंधन से बिजली उत्पादन का प्रस्ताव
फेरो एलॉय यूनिट
1 इकाई, 9 एमवीए क्षमता
स्टील उत्पादन के लिए मिश्र धातु निर्माण
ब्रिक/सहायक निर्माण इकाइयां
फ्लाई ऐश आधारित ईंट निर्माण और अन्य सहायक उत्पादन गतिविधियां
कुल प्रभाव का दायरा
भारी औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि
कोयला और खनिज आधारित ईंधन की खपत में बढ़ोतरी
उत्सर्जन (धूल, धुआं, गैस) में संभावित वृद्धि
जल उपयोग और अपशिष्ट उत्पादन में विस्तार
पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया
परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य
जनसुनवाई के माध्यम से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित
30 दिन की अवधि में लिखित आपत्तियां प्रस्तुत करने का प्रावधान
स्थानीय स्तर पर संभावित प्रभाव
वायु गुणवत्ता पर दबाव बढ़ने की आशंका
भूजल और सतही जल स्रोतों पर अतिरिक्त भार
कृषि भूमि और आजीविका पर प्रभाव
स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में संभावित वृद्धि.