सारंगढ़–बिलाईगढ़ (संवाददाता):
लगातार खुलासों और शिकायतों के बावजूद गुडेली क्षेत्र में अवैध खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। डमरुआ डिजिटल द्वारा एक के बाद एक प्रकाशित खबरों के जरिए इस पूरे मामले को उजागर किया गया, संबंधित अधिकारियों तक जानकारी भी पहुंचाई गई लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में SDM के निर्देश पर टीमरलगा क्षेत्र में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मशीनों और वाहनों को जब्त किया। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने सख्ती का संदेश देने की कोशिश जरूर की, लेकिन सवाल अब यह उठ रहा है कि वही सख्ती गुडेली में क्यों नजर नहीं आ रही?
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का साफ कहना है कि अगर प्रशासन कार्रवाई के मूड में है, तो फिर गुडेली को अछूता क्यों छोड़ा गया। क्षेत्र में खुलेआम खनन गतिविधियां जारी हैं, जिससे यह संदेह गहराने लगा है कि कहीं यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता भर तो नहीं थी।
जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष और समान कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई का दायरा सीमित क्यों रखा गया और गुडेली में सक्रिय खनन माफियाओं पर अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
सूत्रों की मानें तो गुडेली में खनन गतिविधियां पहले की तरह ही संचालित हो रही हैं। दिन-रात मशीनों की आवाज और भारी वाहनों की आवाजाही इस बात की गवाही दे रही है कि कार्रवाई का डर यहां असर नहीं दिखा पा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन वाकई अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए गंभीर है या फिर बड़े नेटवर्क को बचाने के लिए चुनिंदा कार्रवाई की जा रही है?
फिलहाल, गुडेली के हालात यह संकेत दे रहे हैं कि जब तक ठोस और व्यापक कार्रवाई नहीं होती, तब तक अवैध खनन पर अंकुश लगाना मुश्किल है।
बहरहाल गुडेली में जारी अवैध खनन प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि टीमरलगा में कार्रवाई संभव है, तो गुडेली में क्यों नहीं यह सवाल अब आम लोगों की जुबान पर है। प्रशासन की अगली चाल ही तय करेगी कि यह कार्रवाई वास्तव में सख्त थी या सिर्फ दिखावे तक