सारंगढ़–बिलाईगढ़ (संवाददाता):
जिले के गुडेली क्षेत्र में खनिज गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र में संचालित तिरुपति क्रेशर को लेकर मिली जानकारी के अनुसार, यहां चूना पत्थर का उपयोग गिट्टी निर्माण में किया जा रहा है और तैयार सामग्री बाजार में खपाई जा रही है।
हालांकि, इस पूरे संचालन में उपयोग किए जा रहे पत्थर के स्रोत और उससे जुड़े राजस्व दस्तावेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिसके चलते मामला अब जांच का विषय बनता जा रहा है।
पत्थर के स्रोत और राजस्व पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि क्रेशर में उपयोग हो रहे पत्थर के संबंध में आवश्यक दस्तावेज और रॉयल्टी भुगतान की स्थिति सामने नहीं आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि खनिज का स्रोत पारदर्शी नहीं है, तो शासन को मिलने वाला राजस्व किस प्रकार सुनिश्चित हो रहा है।
हालिया कार्रवाई से बढ़ी सख्ती
गौरतलब है कि हाल ही में प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 पोकलेन मशीन और एक हाईवा वाहन जप्त किया है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि प्रशासन अब खनिज मामलों में सख्ती के मूड में है।
अब निगाहें तिरुपति क्रेशर पर
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि—
क्या इसी सख्ती के तहत तिरुपति क्रेशर के संचालन की भी निष्पक्ष और गहन जांच हो पाएगी?
या फिर यह मामला केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा?
प्रशासन के लिए टेस्ट केस
गुडेली का यह मामला अब प्रशासन के लिए एक टेस्ट केस बनता नजर आ रहा है।
यदि यहां पारदर्शी जांच होती है, तो यह एक मजबूत संदेश जाएगा कि खनिज मामलों में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।
जांच की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि संबंधित विभाग द्वारा मौके पर निरीक्षण कर—
1.पत्थर के स्रोत की पुष्टि
2.भंडारण की स्थिति
3.और गिट्टी निर्माण की प्रक्रिया
का सत्यापन किया जाना आवश्यक है, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
यह समाचार क्षेत्र से प्राप्त जानकारी और स्थानीय चर्चाओं के आधार पर प्रकाशित किया गया है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाएगा।