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खाकी के नए तेवर से पुराना तंत्र बेचैन @ इरादे नेक हों तो कोलकाता से भी रायगढ़ के सटोरियों को खींच लाती है पुलिस !

रायगढ़ के सट्टा दलाल कोलकाता के होटल से चलाते थे करोड़ों का दो नंबरी खेल, पहली बार पकड़े गए

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डमरूआ /रायगढ़। रायगढ़ में वर्षों से जड़ जमा चुके सट्टा उद्योग पर इस बार पुलिस ने ऐसा प्रहार किया है, जिसने शहर के उन हलकों में खलबली मचा दी है जहां मोबाइल की घंटी के साथ लाखों का दांव लगना सामान्य बात बन चुकी थी। कोलकाता के एक होटल से संचालित इंटर स्टेट ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ कर पुलिस ने न केवल स्थायी वारंटियों को गिरफ्तार किया है, बल्कि उस समानांतर तंत्र को भी चुनौती दी है जो अब तक हर कार्रवाई के बाद फिर से खड़ा हो जाया करता था।
25 मोबाइल, तीन लैपटॉप, एक टैबलेट, कैलकुलेटर और नगदी सहित करीब 6.50 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। आरोपियों के डिजिटल लेखा-जोखा की जांच में पिछले एक माह में करोड़ों रुपए के दांव लगाए जाने के संकेत मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों में धर्मेंद्र शर्मा, शेख मोहम्मद शाहबाज, मोहम्मद मजहर, मोहम्मद फारूख और रोहित बुटानी शामिल हैं। दो अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है।

वही शहर, बदला हुआ नेतृत्व

रायगढ़ में सट्टा उद्योग कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि वर्षों से फलता एक संगठित कारोबार रहा है। हर नए पुलिस कप्तान ने पदभार संभालते ही जुआ और सट्टा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा किया, शुरुआती कुछ दिन छापे भी पड़े, सुर्खियां भी बनीं, लेकिन कुछ ही समय में वही पुराने चेहरे फिर सक्रिय दिखने लगे।
शहर यह भी नहीं भूला है कि कभी सटोरियों के नाम लिखने पर पत्रकारों को उल्टा सलाह दी जाती थी कि ऐसे नाम सार्वजनिक न किए जाएं। सवाल उठता था कि आखिर संरक्षण किसका है और संरक्षण क्यों है। अब जब नेतृत्व बदला है तो कार्रवाई की रफ्तार और उसका दायरा दोनों ने संकेत दिया है कि इस बार मामला सिर्फ खानापूर्ति नहीं है।

कोलकाता से चलता था नेटवर्क

पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली कि फरार वारंटी कोलकाता में डेरा डाले हुए हैं और वहीं से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित कर रहे हैं। संयुक्त टीम बनाकर कोलकाता रवाना हुई पुलिस ने हावड़ा क्षेत्र के होटल में दबिश देकर सभी आरोपियों को पकड़ा।
आरोपी मोबाइल के माध्यम से संपर्क कर ऑनलाइन बेटिंग एप के जरिए दांव लगवाते थे। भुगतान डिजिटल माध्यमों से होता था और पूरा नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। यह स्पष्ट है कि यह कोई छोटा स्थानीय खेल नहीं बल्कि तकनीकी और आर्थिक रूप से मजबूत संगठित गिरोह था।

पुलिस का संदेश और असली परीक्षा

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जुआ और सट्टा से जुड़े आरोपी कहीं भी छिपें, उन्हें पकड़ा जाएगा और कठोर कार्रवाई होगी। यह बयान सख्त है, लेकिन शहर की स्मृति भी कमजोर नहीं है। यहां कई बार सख्ती दिखाई गई, फिर वही सिस्टम लौट आया।
जुआ और सट्टा पर यदि ईमानदार कार्रवाई होती है तो उससे पहले यह देखना होगा कि संरक्षण की परतें कितनी मोटी हैं। अक्सर प्रायोजित कार्रवाई के बाद कुछ दिनों की खामोशी और फिर सुविधा शुल्क की नई दरों के साथ वही कारोबार दोबारा शुरू हो जाता है। इस बार फर्क तभी साबित होगा जब जांच केवल गिरफ्तार चेहरों तक सीमित न रहकर उस आर्थिक और प्रशासनिक श्रृंखला तक पहुंचे जो इस उद्योग को सांस देती रही है।

स्थायी वारंट की तामिली, फाइलों से निकले नाम

कोतवाली और चक्रधरनगर थानों में दर्ज वर्ष 2025 के मामलों में फरार आरोपियों के विरुद्ध स्थायी वारंट जारी थे। लंबे समय से लंबित इन वारंटों की तामिली कर पुलिस ने संकेत दिया है कि अब पुरानी फाइलें भी खुलेंगी और फरारी स्थायी सुरक्षा कवच नहीं रहेगी

डिजिटल सट्टा का संगठित मॉडल

बरामद 25 मोबाइल, तीन लैपटॉप और टैबलेट इस बात के प्रमाण हैं कि गिरोह तकनीकी रूप से सक्षम था। ऑनलाइन एप, लिंक शेयरिंग और डिजिटल भुगतान के जरिए लाखों का लेनदेन किया जा रहा था। हिसाब-किताब के दस्तावेज करोड़ों के दांव की ओर इशारा करते हैं।

सबसे बड़ा सवाल – क्या दाग धुलेंगे

रायगढ़ में सट्टा केवल अपराध नहीं, एक स्थापित उद्योग की तरह विकसित हो चुका था। यदि इस बार कार्रवाई निरंतर रही, संरक्षण की कड़ियां उजागर हुईं और आर्थिक जड़ें काटी गईं तो वर्षों से पुलिस की छवि पर लगे दाग कुछ हल्के हो सकते हैं। अन्यथा यह भी एक तेज लहर बनकर शांत हो जाएगी और पुराना तंत्र फिर सिर उठा लेगा।

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