सारंगढ़ | विशेष रिपोर्ट
सारंगढ़ को अक्सर अफवाहों की जमीन कहा जाता है, जहां एक बात देखते ही देखते कई रूप ले लेती है। एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलाई गई सनसनीखेज कहानी ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल जरूर मचाई, लेकिन जांच और तथ्यों की कसौटी पर आते ही आरोपों की हवा निकलती नजर आ रही है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला वर्ष 2023 में अस्तित्व में आया था, जिसके पहले कलेक्टर डी. राहुल वेंकट रहे। उनके कार्यकाल में कलेक्टर के नाम पर फर्जी कॉल कर पैसों की मांग करने वाले व्यक्ति को साइबर सेल द्वारा पकड़ा जाना इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन अफवाह और फर्जीवाड़े को हल्के में नहीं लेता। इसी पृष्ठभूमि में अब सोशल मीडिया के माध्यम से लगाए गए नए आरोपों को भी प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
19 फरवरी को अखिल भारतीय हिंदू महासभा (युवा मोर्चा) के जिला अध्यक्ष आकाश भारद्वाज द्वारा फेसबुक पोस्ट के जरिए जिला प्रशासन पर कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। पोस्ट में दावा किया गया कि जिले के कलेक्टर, खनिज विभाग के अधिकारी और कोसीर थाना प्रभारी को अवैध उत्खनन के बदले राशि व 1,35,000 रुपये मूल्य का मोबाइल फोन उपहार स्वरूप दिया गया है। यहां तक कि एक मोबाइल दुकान का नाम लेते हुए लेनदेन की बात कही गई, जिसने मामले को और विवादित बना दिया।
इन आरोपों पर प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह सभी दावे पूर्णतः बेबुनियाद, तथ्यहीन और निराधार हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे शासन द्वारा प्रदत्त अधिकारों और दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और ईमानदारी से कर रहे हैं। बिना किसी ठोस प्रमाण के इस प्रकार के आरोप न केवल अधिकारियों की छवि धूमिल करने का प्रयास हैं, बल्कि कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश भी माने जाते हैं।
प्रशासनिक पक्ष का यह भी कहना है कि हाल के दिनों में जिले में अवैध खनन और खनिज माफियाओं पर की जा रही कार्रवाई से कुछ तत्व असहज हैं और इसी बौखलाहट में सोशल मीडिया को हथियार बनाकर प्रशासन पर हमला किया जा रहा है। कर्मठ अधिकारियों के नाम सार्वजनिक रूप से घसीटना पूरे प्रशासनिक तंत्र को बदनाम करने की एक सुनियोजित कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा द्वारा सारंगढ़ थाना में लिखित ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें पूरे प्रकरण की जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आकाश भारद्वाज के खिलाफ मानहानि और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। साइबर सेल भी सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुट गई है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बिना प्रमाण जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार या अवैध गतिविधियों के आरोप लगाए जाएं। सोशल मीडिया पर की गई ऐसी पोस्ट न केवल भ्रम फैलाती हैं, बल्कि जनता के बीच अविश्वास का माहौल भी बनाती हैं।
जिले के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि प्रशासन की छवि अब तक सेवा, विकास और कानून व्यवस्था से जुड़ी रही है। ऐसे में तथ्यहीन आरोपों ने खुद आरोप लगाने वाले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया को बदनाम करने और दबाव बनाने का माध्यम न बना सके।
अब यह मामला केवल एक फेसबुक पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सच और झूठ के बीच की लड़ाई बन चुका है। प्रशासन के सख्त रुख से संकेत मिल रहे हैं कि अफवाहों और बेबुनियाद आरोपों पर इस बार कानूनी शिकंजा कसना तय है। आने वाले दिनों में जांच के बाद तस्वीर और साफ होगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि सोशल मीडिया के जरिए कीचड़ उछालने की कीमत अब चुकानी पड़ सकती है।