सलूजा कनेक्शन के साये में ट्रिनिटी रेड, स्पा संचालक पर कार्रवाई लेकिन होटल मालिक पर चुप्पी
पूर्व मुख्यमंत्रियों से लेकर वर्तमान सत्ता तक नजदीकियों की चर्चा, ग्राहकों और प्रबंधन की भूमिका पर उठे तीखे सवाल
डमरूआ / रायगढ़।
होटल ट्रिनिटी की सातवीं मंजिल पर संचालित सनराइज स्पा एंड सैलून में कथित देह व्यापार के खुलासे के बाद मामला अब सीधे होटल मालिक शरणजीत सिंह सलूजा और उनकी राजनीतिक पहुंच पर केंद्रित हो गया है। शहर में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि सलूजा की नजदीकियां पूर्व मुख्यमंत्रियों से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री तक रही हैं और वे सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली दखल रखने वाले व्यक्ति माने जाते हैं। ऐसे में नए पुलिस अधीक्षक द्वारा कराई गई रेड के बाद जिस तरह की आधी अधूरी कार्रवाई सामने आई है, उसने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी में स्वीकार किया गया कि होटल परिसर के भीतर अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं और स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार चल रहा था। इसके बावजूद अब तक होटल संचालक शरणजीत सिंह सलूजा के खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया है। छोटे मामलों में जहां किराएदार के साथ मकान मालिक को भी आरोपी बनाया जाता है, वहीं इतने बड़े होटल में कथित रूप से चल रही गतिविधियों के बावजूद मालिक की भूमिका पर चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या होटल प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।
मीडिया के दबाव के बाद स्पा संचालक और मैनेजर को आरोपी बनाया गया, लेकिन जिस होटल भवन में पूरा नेटवर्क संचालित होने की बात कही गई, उसके स्वामी को दायरे से बाहर रखना लोगों को समझ नहीं आ रहा। शहरवासियों का कहना है कि पुलिस ने पहले अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन जब बात प्रभावशाली नाम तक पहुंची तो कार्रवाई की धार कुंद पड़ गई।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्राहकों को लेकर भी है। यदि देह व्यापार चल रहा था तो ग्राहक कौन थे। क्या रेड के समय कोई ग्राहक मौजूद नहीं था। यदि थे तो उनके नाम एफआईआर में क्यों दर्ज नहीं किए गए और उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। और यदि कोई ग्राहक नहीं था तो फिर पुलिस की पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। शहर में यह चर्चा भी है कि क्या कुछ रसूखदार लोग ग्राहक के रूप में मौजूद थे जिन्हें बचा लिया गया।
यह छोटू मालिश वाला कौन ?
इसी प्रकरण में जिस छोटू नाम का जिक्र सामने आ रहा है, वह कोई बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि होटल प्रबंधन से जुड़ा मालिश का काम देखने वाला शख्स बताया जा रहा है। यदि छोटू होटल प्रबंधन से संबद्ध था और कथित गतिविधियों में उसकी भूमिका थी, तो फिर उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही। यह तथ्य पुलिस की जांच की दिशा पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। ट्रिनिटी प्रकरण अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह इस बात की परीक्षा बन गया है कि रायगढ़ में कानून प्रभावशाली नामों से ऊपर है या नहीं।
मालिक पर खामोशी क्यों
यदि अवैध गतिविधियां होटल परिसर में चल रही थीं तो होटल मालिक की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। छोटे मामलों में संपत्ति स्वामी तक को आरोपी बनाया जाता है, लेकिन यहां प्रभावशाली नाम सामने आते ही कार्रवाई रुकती नजर आ रही है। पुलिस की यह भेदभाव पूर्ण कार्यवाही और सिलेक्टेड कार्यवाही किसी भी मायने में ठीक नहीं कहीं जा सकती चुनिंदा लोगों को बचाया जाना और अन्य लोगों पर fir करना, यह पुलिसिया आतंकवाद का दूसरा रूप दिखाई देता है.