Damrua

होटल ट्रिनिटी पर रेड से खुद हड़बड़ाई रायगढ़ पुलिस, छोटे मामलों में शोर बड़े में पछतावे की चुप्पी…

नए एसएसपी को खुश करने की होड़ में अचानक एक्टिव हुई पुलिस, नंबर बढ़ाने के फेर में फर्जी कार्रवाई के आरोप, प्रतिष्ठित होटल पर छापे के बाद भी मीडिया से दूरीIMG 20260209 WA0041

डमरूआ/रायगढ़.
रायगढ़ पुलिस इन दिनों कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिखाई दे रही है। वजह बताई जा रही है नए एसएसपी शशि मोहन को खुश करने और अपनी तथाकथित उपलब्धियों का आंकड़ा बढ़ाने की होड़। इसी चक्कर में जिले के सभी थानों की पुलिस से लेकर साइबर सेल तक अचानक मैदान में उतर आई है। आरोप हैं कि इस ‘नंबर गेम’ में पुलिस असली अपराधियों के साथ-साथ ऐसे लोगों को भी निशाना बना रही है जिनका कथित अवैध धंधों से कोई लेना-देना ही नहीं। ऐसे ही एक मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इसी पृष्ठभूमि में सोमवार रात शहर के प्रतिष्ठित होटल ट्रिनिटी में कोतवाली पुलिस की रेड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस होटल को लंबे समय से पुलिस और प्रशासन का पसंदीदा माना जाता रहा, उसी होटल में स्पा सेंटर की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार कार्यवाही के दौरान चार युवतियों, एक युवक और होटल के कथित मैनेजर को हिरासत में लिया गया है और कोतवाली थाने में देर रात तक पूछताछ जारी रही।

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पिछले कुछ दिनों में पुलिस ने तीन-चार छोटे कथित देह व्यापार के मामलों में छापेमारी कर उन्हें इस अंदाज में पेश किया, मानो नए एसपी के आते ही शहर के अवैध धंधेबाज खुद-ब-खुद सामने आने लगे हों। इन मामलों में पुलिस ने न सिर्फ अपनी पीठ थपथपाई बल्कि फोटो और वीडियो भी तत्काल जारी किए। लेकिन जैसे ही मामला एक बड़े और रसूखदार होटल ट्रिनिटी से जुड़ा, पुलिस का तेवर पूरी तरह बदल गया।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग नहीं दी गई है। जबकि कोतवाली थाने में अभी भी इस मामले से जुड़े कई लोगों के हिरासत में होने की जानकारी मिल रही है। छोटे मामलों में तत्परता दिखाने वाली पुलिस, बड़े होटल पर हुई इस ‘गलती से हुई’ कार्रवाई को जैसे अपना अपराध मानकर चुप्पी साधे बैठी है।

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शहर में यह चर्चा भी तेज है कि एक ओर जूट मिल के मामा-भांजा जैसे चर्चित नामों को संरक्षण दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन सट्टा और कथित देह व्यापार के नाम पर डर पकड़ की कार्रवाई कर आंकड़े चमकाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह सब वास्तव में अपराध के खिलाफ मुहिम है या फिर सिर्फ ऊपर तक संदेश पहुंचाने का खेल।

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