Damrua

गुंडा टैक्स से गैंगवार तक, ढुलमुल पुलिस व्यवस्था ने अपराधियों को बनाया बेखौफ !

नए एसपी शशि मोहन के सामने अग्निपरीक्षा, सुधरेगी पुलिस या जारी रहेगा संरक्षण

रायगढ़-उड़ीसा बॉर्डर हिंसा के 100 से अधिक आरोपी सामने, गिरफ्तारी अब भी शून्यScreenshot 2026 0119 111033

₹400 प्रति गाड़ी अवैध वसूली पर पुलिस की चुप्पी कायम

डमरूआ/रायगढ़।
रायगढ़-उड़ीसा बॉर्डर पर कोल ट्रांसपोर्ट को लेकर हुई हथियारबंद गैंगवार अब सीधे तौर पर जिले की पूर्व पुलिस व्यवस्था की विफलता को उजागर कर रही है। यह साफ हो चुका है कि यह घटना किसी तात्कालिक विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही गुंडा टैक्स की अवैध वसूली और उस पर पुलिस की ढुलमुल, लचर और निष्क्रिय कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष परिणाम है। बाहर से आने वाली ट्रांसपोर्ट गाड़ियों से ₹400 प्रति वाहन की दर से महीनों तक खुलेआम वसूली होती रही, लेकिन न तो इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही वसूली में लिप्त तत्वों पर कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। इसी लापरवाही ने अपराधियों के हौसले इस कदर बढ़ा दिए कि मामला खुलेआम हथियारों के दम पर गैंगवार में तब्दील हो गया।
इस पूरे प्रकरण का सबसे गंभीर और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अब तक सामने आए घटनाक्रम में 100 से भी अधिक लोग आरोपी या संदिग्ध के रूप में चिन्हित किए जा चुके हैं, बावजूद इसके एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। न तो गैंगवार में शामिल मुख्य चेहरे जेल पहुंचे और न ही रायगढ़ क्षेत्र में सक्रिय उस वसूली गैंग पर कोई शिकंजा कसा गया, जो कथित तौर पर कोल ट्रांसपोर्ट को अपने इशारों पर चलाता रहा। यह स्थिति सीधे तौर पर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या पूर्व में पुलिस व्यवस्था सच में सक्रिय थी या फिर अपराधियों को मौन संरक्षण मिलता रहा।

पुलिस की कमजोरी से ताकतवर बने गैंग, अब नई कप्तानी पर टिकी नजर

जानकारी के अनुसार रायगढ़-उड़ीसा सीमा क्षेत्र में संगठन और डंपर पार्टी की आड़ लेकर कुछ गुंडा तत्वों ने बाहर से आने वाली कोल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों से नियमित अवैध वसूली का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। उड़ीसा के ट्रांसपोर्टर्स ने लंबे समय तक व्यापार बचाने के लिए यह गुंडा टैक्स मजबूरी में दिया, लेकिन जब विरोध किया गया तो मारपीट और हिंसा शुरू हो गई। इसके बाद वही वसूली करने वाले तत्व खुद को पीड़ित बताकर फरियादी बन गए और पूरे मामले की दिशा मोड़ने की कोशिश की गई। यदि समय रहते पुलिस ने अवैध वसूली पर कार्रवाई की होती, तो न गैंगवार होती और न ही रायगढ़ एक बार फिर अपराध और भय के नक्शे पर उभरता।

Screenshot 2026 0119 114536

 100 से ज्यादा आरोपी, गिरफ्तारी अब भी शून्य

हथियारों का प्रदर्शन, लूट, गंभीर मारपीट और संगठित हिंसा जैसे आरोप सामने आने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करता है। आमजन का मानना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी गिरफ्तारी न होना अपराधियों को खुला संदेश दे रहा है कि कानून का डर खत्म हो चुका है।

₹400 प्रति गाड़ी गुंडा टैक्स, कार्रवाई की समयसीमा क्यों नहीं

रायगढ़ में बाहर की ट्रांसपोर्ट गाड़ियों से ₹400 प्रति वाहन की दर से वसूली कोई छिपा तथ्य नहीं था। यह अवैध वसूली महीनों से चल रही थी, जिसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर सभी को थी। इसके बावजूद पुलिस ने न तो कोई स्वतंत्र प्रकरण दर्ज किया और न ही वसूली गैंग को चिन्हित कर कार्रवाई की। सवाल यह है कि पुलिस इस पर कोई स्पष्ट डेडलाइन तय करेगी या फिर यह अवैध धंधा यूं ही चलता रहेगा।

नए एसपी शशि मोहन, सुधार की उम्मीद या पुरानी लाचारी ?

रायगढ़ में नए पुलिस अधीक्षक के रूप में शशि मोहन की पदस्थापना हो चुकी है। अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि उनके नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था वास्तव में चुस्त-दुरुस्त होगी या फिर पूर्व की तरह ही ढुलमुल रवैया जारी रहेगा। यह मामला नए एसपी के लिए सीधी अग्निपरीक्षा है, जहां यह तय होगा कि पुलिस गुंडा टैक्स, वसूलीबाजों और गैंगवार के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करती है या फिर अपराधी पहले की तरह बेखौफ घूमते रहेंगे। फिलहाल रायगढ़ यह जानना चाहता है कि कार्रवाई कब होगी। क्या पुलिस यह स्पष्ट करेगी कि गिरफ्तारी और अवैध वसूली पर रोक के लिए कोई समयसीमा तय की गई है, या फिर जिले की कानून व्यवस्था पहले की तरह ही सवालों के घेरे में चलती रहेगी।

Facebook
WhatsApp
Twitter
Telegram