डमरूआ/रायगढ़।
हमीरपुर बॉर्डर पर दिनदहाड़े हुई हथियारबंद गैंगवार की गंभीर घटना के बाद भी अब तक मुख्य आरोपी बंटी डालमिया उर्फ घनश्याम की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा को सील करने की कार्रवाई जरूर की है, लेकिन इसका नतीजा केवल औपचारिकता तक सीमित नजर आ रहा है। जिस व्यक्ति पर संगठित हिंसा, लूट, हथियारों के खुले प्रदर्शन और दहशत फैलाने जैसे गंभीर आरोप हैं, वह आज भी कानून की पकड़ से बाहर है। सीमा सील होने के बावजूद आरोपी का खुलेआम सक्रिय रहना इस बात का संकेत दे रहा है कि अपराधी अब पुलिस कार्रवाई से डरने की बजाय उसे चुनौती देने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर जश्न, पुलिस को खुली चुनौती
गिरफ्तारी न होने के बीच बंटी डालमिया ने सोशल मीडिया पर अपने बच्चे का जन्मदिन मनाते हुए वीडियो और फोटो साझा किए हैं। इन पोस्टों में वह पूरी तरह निश्चिंत और बेखौफ नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ पारिवारिक आयोजन नहीं बल्कि पुलिस और प्रशासन के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है कि वह आज भी स्वतंत्र है और कानून उसका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा। गैंगवार जैसी गंभीर घटना के बाद आरोपी का इस तरह सार्वजनिक रूप से सामने आना पुलिस की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े करता है और आम नागरिकों में यह भावना पैदा करता है कि अपराधियों को कानून का भय समाप्त होता जा रहा है
पुलिस-प्रशासन और डालमिया की नजदीकियों की चर्चा
रायगढ़ में यह चर्चा भी तेज है कि बंटी डालमिया का पुलिस और प्रशासन के साथ हमेशा से सहयोगात्मक व्यवहार का आदान-प्रदान रहा है। बताया जाता है कि शहर में आयोजित चक्रधर समारोह जैसे बड़े सरकारी-सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए महंगी और लग्जरी गाड़ियों की व्यवस्था में भी डालमिया की भूमिका रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उसकी यह कथित ‘सेवाएं’ आज गिरफ्तारी में ढील का कारण बन रही हैं। आमजन के बीच यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं कानून व्यवस्था उस व्यक्ति के प्रति नरमी तो नहीं बरत रही, जिस पर संगठित अपराध के गंभीर आरोप हैं।
क्या गिरफ्तारी न कर उतारा जा रहा है कर्ज
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस बंटी डालमिया की गिरफ्तारी न करके उसके पुराने एहसानों या सहयोग का कर्ज उतार रही है। यदि ऐसा है तो यह कानून के समानता के सिद्धांत पर सीधा प्रहार है। एक ओर आम नागरिकों पर छोटी-छोटी बातों में सख्ती दिखाई जाती है, वहीं दूसरी ओर गैंगवार जैसे मामलों के आरोपी खुलेआम घूमते और सोशल मीडिया पर चुनौती देते नजर आते हैं। यह स्थिति न केवल पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिले में सामाजिक असंतोष और भय को भी बढ़ावा देती है।
कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता दांव पर
यदि समय रहते बंटी डालमिया जैसे आरोपियों पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संदेश जाएगा कि रायगढ़ में गैंगवार करने वालों के लिए कानून से बचने के रास्ते खुले हैं। सीमा सील करना, बयान जारी करना और औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। अब जरूरत है ऐसी कार्रवाई की, जो यह साबित कर सके कि कानून सभी के लिए बराबर है, चाहे उसका सामाजिक या प्रशासनिक दायरा कितना ही व्यापक क्यों न हो।
क्या है पूरा मामला
घटना 18 जनवरी 2026 की शाम लगभग 4.45 से 5.00 बजे के बीच इंडियन ऑयल मिश्रा पेट्रोल पंप के पीछे स्थित यूनियन कार्यालय की है। आरोप है कि बंटी डालिया उर्फ घनश्याम, गोकुल गोयका, धीरेंद्र प्रधान, विपिन अग्रवाल, धनी मित्रो, तेजराम सहित लगभग 100 से 140 अज्ञात लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। भीड़ के पास रिवॉल्वर, पिस्टल, तलवार, लाठी, हॉकी डंडे और ज्वलनशील पदार्थ मौजूद थे। कार्यालय में घुसते ही हमलावरों ने लोगों को चारों ओर से घेर लिया, जबरन बाहर सड़क पर घसीटा, पटक पटक कर पीटा और भय का माहौल बना दिया।इ स हमले में शंकर अग्रवाल, प्रमाशंकर साही, सुभाष पांडेय, संजय अग्रवाल और सतीश कुमार चौबे को गंभीर चोटें आई हैं। आरोप है कि हमलावरों ने कार्यालय में रखे चार टोकन और लगभग पंद्रह हजार रुपये नकद भी जबरन लूट लिए। पुलिस वाहन के पहुंचने की आशंका होते ही हमलावरों ने दोबारा जान से मारने की धमकी दी और बॉर्डर की ओर लगभग एक किलोमीटर दूर जाकर खड़े हो गए, जिससे घटना की सुनियोजित गैंगवार प्रकृति उजागर होती है।
हथियारों का बेखौफ़ खुला प्रदर्शन
इस वारदात का सबसे गंभीर पहलू हथियारों का खुला और संगठित प्रदर्शन है, जहां 100 से अधिक लोगों की भीड़ रिवॉल्वर, पिस्टल, तलवार, लाठी, हॉकी डंडे और ज्वलनशील पदार्थों के साथ एकजुट होकर पहुंची, जो इसे सामान्य विवाद से उठाकर संगठित अपराध की श्रेणी में ले जाता है। दूसरी बड़ी फीडिंग सीमा क्षेत्र का दुरुपयोग है, जहां ओडिशा छत्तीसगढ़ बॉर्डर को अपराधियों ने सेफ जोन की तरह इस्तेमाल किया और पुलिस की मौजूदगी की आशंका होते ही उसी दिशा में जाकर खड़े हो गए, जिससे कानून प्रवर्तन की सीमाएं उजागर हुईं। तीसरा और सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत विवाद पर नहीं बल्कि वैधानिक यूनियन गतिविधियों पर किया गया, जिससे श्रमिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और औद्योगिक शांति पर सीधा प्रहार हुआ है।
एक हथियार मिर्ची पाउडर भी….
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में मिर्ची स्प्रे की भूमिका भी अहम् थी, आशीष यादव की अवैध वसूली का मुद्दा भी काफी गहराया बताया यह जा रहा है कि बंटी डालमिया अपने साथ मिर्ची स्प्रे लेकर गया था जब विवाद हुआ तो उसने मिर्ची स्प्रे किया इसके बाद मामला भड़क गया और मारपीट शुरू हो गई साथ ही गोलीबारी की नौबत भी आ गई हथियार लहराए जाने लगे. पूर्व की एक घटना में ताबड़तोड़ फायरिंग भी हो चुकी है. कॉल ट्रांसपोर्ट का व्यापार अब गैंग के दम पर संचालित किया जा रहा है दोनों ही ओर से वर्चस्व की लड़ाई स्पष्ट दिखाई दे रही है, एक पक्ष रायगढ़ में दबदबा काम करना चाहता है तो दूसरा उड़ीसा में, इन सब का परिणाम यह है कि रायगढ़ को औद्योगिक प्रदूषण के साथ-साथ गैगवार का प्रदूषण भी झेलना पड़ रहा है.
औद्योगिक जिला रायगढ़ में गैंग कल्चर की बढ़ती जड़ें
औद्योगिक गतिविधियों, ठेकेदारी व्यवस्था और श्रमिक संगठनों के इर्द-गिर्द धीरे-धीरे गैंग कल्चर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है। दबदबा बनाने, वसूली और वर्चस्व की लड़ाई में हथियारों का इस्तेमाल अब अपवाद नहीं रह गया है। बंटी डालिया जैसे नामों का उभरना इस बात का संकेत है कि संगठित गिरोह स्थानीय विवादों को गैंगवार में बदलने की क्षमता हासिल कर चुके हैं। यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते रोक नहीं लगी तो रायगढ़ का सामाजिक संतुलन और औद्योगिक शांति गंभीर खतरे में पड़ सकती है।