सारंगढ़-बिलाईगढ़ | 8 जनवरी 2026 जिले में अवैध खनन और खनिज परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। कोसीर क्षेत्र में की गई हालिया कार्रवाई में चार ट्रैक्टरों को अवैध रेत परिवहन के आरोप में जब्त किया गया। यह कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश और खनिज अधिकारी के मार्गदर्शन में की गई, जिसे विभाग अपनी “सक्रियता” के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, खनिज अमले और पुलिस की संयुक्त टीम ने कोसीर थाना क्षेत्र में गौण खनिज रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल चार वाहनों पर कार्रवाई की। इनमें ट्रैक्टर क्रमांक CG-06-E-7641, CG-13-Y-7579 और दो सोनालिका (सोल्ड) ट्रैक्टर शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षार्थ थाना परिसर में रखा गया है। कार्रवाई *छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 और खान एवं खनिज विकास अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत की गई है।
कार्रवाई जरूरी, लेकिन सवाल भी उतने ही जरूरी
कोसीर में हुई यह कार्रवाई कानून के दायरे में सही मानी जा सकती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ छोटे स्तर के रेत परिवहन पर कार्रवाई कर देना ही अवैध खनन के खिलाफ निर्णायक कदम माना जाए?
गुडेली जैसे बड़े गौण खनिज ग्राम पर चुप्पी क्यों?
जिले के भीतर ही गुडेली जैसे क्षेत्रों में दिन-दहाड़े रोज़ाना लाखों रुपये के गौण खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन की चर्चा आम है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, भारी मशीनों और दर्जनों वाहनों के जरिए बड़े पैमाने पर खनिज निकाला और खपाया जा रहा है। इसके बावजूद वहां न तो नियमित छापेमारी दिखती है और न ही वैसी सख्त कार्रवाई, जैसी कोसीर में दिखाई गई।
सक्रियता’ का चयनित प्रदर्शन?
यहीं से खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल उठते हैं।
* क्या विभाग सिर्फ छोटे ट्रैक्टर और सीमित परिवहन पर कार्रवाई कर अपनी सक्रियता दिखाना चाहता है?
* क्या बड़े अवैध खनन स्थलों पर कार्रवाई से परहेज किसी “मौन समर्थन” की ओर इशारा करता है?
* अगर कानून सबके लिए समान है, तो बड़े खिलाड़ियों पर हाथ डालने में हिचक क्यों?
संतुलन जरूरी है, लेकिन ईमानदारी उससे भी ज्यादा
यह सच है कि अवैध खनन पर किसी भी स्तर की कार्रवाई जरूरी है, और कोसीर की कार्रवाई को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। लेकिन जब बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध उत्खनन पर खामोशी छाई रहे, तब छोटी कार्रवाइयाँ केवल “सांत्वना” बनकर रह जाती हैं।
अब नजरें आगे की कार्रवाई पर
खनिज विभाग का कहना है कि कलेक्टर के निर्देशानुसार आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। अब देखना यह है कि यह कार्रवाई सिर्फ छोटे मामलों तक सीमित रहती है या फिर गुडेली जैसे बड़े अवैध खनन केंद्र भी वास्तव में रडार पर आते हैं।
क्योंकि अगर कानून की मार सिर्फ कमजोर कंधों पर ही पड़े, तो सवाल उठेंगे—और वे सवाल अब जिले में तेज़ होते जा रहे हैं।