Damrua

जब वर्दी फटी तब खुद न्यायालय बन गए और जब नाबालिग की इज्जत लुटी तो समझौता करने का दबाव बनाने लगे….

नाबालिग से वर्षों तक यौन शोषण का आरोप, थाने पहुंची पीड़िता तो समझौते का दबाव…

तमनार में महिला आरक्षक से बदसलूकी पर आरोपी का जुलूस, रायगढ़ में नाबालिग की फरियाद पर पुलिस की चुप्पी….

डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। जिले में कानून के दोहरे मापदंडों को उजागर करने वाला एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है। एक नाबालिग युवती ने लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उसके बचपन से लेकर किशोरावस्था तक उसके साथ लगातार जबरन शारीरिक शोषण किया गया, उसे कम उम्र में शादी के नाम पर एक अधेड़ व्यक्ति के हवाले कर दिया गया और बाद में भी मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और जबरदस्ती का सिलसिला जारी रहा। पीड़िता की पहचान और पता कानूनन कारणों से गोपनीय रखे जा रहे हैं। पीड़िता के अनुसार जब वह न्याय की आस लेकर महिला थाने पहुंची तो उसकी शिकायत दर्ज करने के बजाय कथित आरोपियों को फोन कर समझौते का दबाव बनाया गया।

पीड़िता ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि घटना के समय वह नाबालिग थी और वर्ष 2021 में उसकी उम्र 14 वर्ष से कुछ अधिक थी। उसी दौरान उसे जबरन रायगढ़ लाकर एक व्यक्ति के साथ रखा गया और लगातार शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर न केवल मारपीट की गई बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा भी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। पीड़िता का यह भी आरोप है कि नाबालिग अवस्था में उससे शारीरिक संबंध बनाए जाने के कारण उसके दो बच्चे भी हुए, जो स्वयं इस पूरे अपराध के जीवित साक्ष्य हैं।

आवेदन में बताया गया है कि आरोपियों द्वारा उसे घर से बाहर निकाल दिया गया, गंदी-गंदी गालियां दी गईं और यह धमकी दी गई कि यदि उसने पुलिस में रिपोर्ट की तो चोरी के झूठे मामले में फंसा कर जेल भिजवा दिया जाएगा। 01 जनवरी 2026 से वह पहचान के लोगों के सहारे रह रही है और उसके तथा उसके बच्चों के भरण-पोषण का कोई साधन नहीं बचा है। पीड़िता ने यह भी उल्लेख किया है कि उसके साथ बलात्कार करने वाले व्यक्ति और उसके साथियों के साथ अब वह किसी भी स्थिति में नहीं रहना चाहती।

इस पूरे मामले ने तब और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब इसकी तुलना तमनार थाना क्षेत्र की उस घटना से की जा रही है, जहां एक दिन पहले ही महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ने और उससे मारपीट के मामले में पुलिस ने कानून से हटकर कार्रवाई करते हुए आरोपी को जूते की माला पहनाकर उसका जुलूस निकाला। सवाल यह है कि जब बात पुलिस की वर्दी की आती है तो त्वरित और आक्रामक कार्रवाई होती है, लेकिन जब एक नाबालिग पीड़िता अपने जीवन को बर्बाद किए जाने की शिकायत लेकर थाने पहुंचती है तो उसे न्याय देने के बजाय समझौते का रास्ता क्यों दिखाया जाता है।

यह मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है बल्कि महिला सुरक्षा, नाबालिगों के संरक्षण और कानून के समान अनुप्रयोग की अवधारणा को भी कठघरे में खड़ा करता है।

तथ्य जो सिस्टम पर खड़े करते हैं सवाल

पीड़िता के अनुसार अपराध की शुरुआत नाबालिग अवस्था में हुई जबरन शादी और वर्षों तक शारीरिक शोषण किया गया, विरोध करने पर मारपीट और घर से निकाले जाने की शिकायत की गई लेकिन थाने पहुंचने पर शिकायत दर्ज नहीं की गई बल्कि समझौते का दबाव पुलिस की ऒर से बनाया जा रहा है. तमनार में महिला आरक्षक के मामले में कानून से इतर सख्ती जिसमे आरोपी को जूते चप्पल की माला पहनाकर उसका जुलूस निकाला गया था. एक ही जिले में दो अलग-अलग मापदंड, पुलिस की भूमिका संदिग्ध करते हैं.

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