Damrua

धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोपी एस0डी0एम0 अशोक मार्बल और पटवारी परमेश्वर नेताम की जमानत याचिका सेशन कोर्ट घरघोड़ा ने किया खारिज

मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार-आशीष कुमार मिश्रा ने जमानत याचिका का किया था घोर विरोध

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डमरूआ न्यूज़ /घरघोड़ा.
रेवेन्यू रेकार्ड में हेराफेरी करके फर्जी रेकार्ड बनाने के बहुचर्चित प्रकरण के आरोपी अनुविभागीय दण्डाधिकारी अशोक मार्बल एवं पटवारी परमेश्वर नेताम की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई गत 10 दिसम्बर को अपर सत्र न्यायाधीश घरघोड़ा माननीय अभिषेक शर्मा के न्यायालय में की गई ।
एस0डी0एम0 अशोक मार्बल और पटवारी परमेश्वर नेताम की ओर से लम्बी बहस करते हुए उन्हें पूरी तरह निर्दोष बताते हुए रिपोर्टकर्ता पर आरोप लगाया गया कि समूचा प्रकरण अनुविभागीय दण्डाधिकारी को ब्लेकमेल करने के लिये पेश किया गया है ।
उपरोक्त जमानत याचिका का घोर विरोध करते हुए पीड़ित की ओर से उपस्थित मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा ने न्यायालय को बताया कि आरोपी अशोक मार्बल के विरुद्ध अन्य प्रकरण में भी सैकड़ों करोड़ के घोटाला की फाइल ई.ओ.डब्लू रायपुर में जांचाधीन है । इस भारी भरकम भ्रष्टाचार की जांच आई.ए.एस. अधिकारी द्वारा करने पर एस0डी0एम0 मार्बल पर भ्रष्टाचार सिद्ध हो जाने पर मंत्रालय के निर्देश पर रायगढ़ के कलेक्टर ने एस0डी0एम0 अशोक मार्बल के विरुद्ध एफ0आई0आर0 करने का आदेश दिया है, जिसे चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं हाईकोर्ट से भी खारिज हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद आज तक एस0डी0एम0 मार्बल के विरुद्ध एफ0आई0आर0 दर्ज नहीं हुई, जो इस बात का सबूत है कि आरोपी एस0डी0एम0 आदतन अपराधी है एवं इतना प्रभावशाली है कि कलेक्टर का आदेश होने के बाद भी उसके विरुद्ध एफ0आई0आर0 दर्ज कराने के मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया एवं ई0ओ0डब्ल्यू में भी मामला ठण्डे बस्ते में चला गया है। ऐसे दबंग और प्रभावशाली आरोपी की जमानत स्वीकार हो जाने पर वह पूरी विवेचना को प्रभावित कर देगा जिससे न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा इसलिये ऐसे दबंग और प्रभावशाली आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं होगा ।

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अशोक कुमार मिश्रा वकील ने न्यायालय का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि एस0डी0एम0 अशोक मार्बल द्वारा रिपोर्टकर्ता को डराने के लिये ही ब्लेकमेलर की संज्ञा देकर न्यायालय को गुमराह किया जा रहा है जबकि इस अधिकारी के विरुद्ध शासन के निर्देश पर स्वयं रायगढ़ कलेक्टर ने भी एफ0आई0आर0 दर्ज कराने का आदेश दिया है एवं विभागीय जांच में भी धोखाधड़ी पूर्वक किया गया भ्रष्टाचार साबित पाया गया है।
दोनों पक्ष की लम्बी दलील सुनने के पश्चात विद्वान अपर सत्र न्यायाधीश माननीय अभिषेक शर्मा ने समूचे प्रकरण का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अपराध की गंभीरता को देखते हुए एवं रेकार्ड में उपलब्ध साक्ष्य को देखते हुए एस0डी0एम0 अशोक मार्बल और पटवारी परमेश्वर नेताम की जमानत याचिका खारिज कर दिया । उल्लेखनीय है कि एस0डी0एम0 अशोक मार्बल और पटवारी परमेश्वर नेताम ने फर्जी कागजात बनाकर बिहारी लाल पटेल नामक व्यक्ति को ग्राम-झिंकाबहाल स्थित भूमि का मालिक बना दिया, जिसके बाद यह जमीन ग्यारह लाख चैरासी हजार रूपये में पीड़ित अशोक कुमार अग्रवाल के पक्ष में विक्रय कर दी गई, जिसके बाद एस0डी0एम0 मार्बल और पटवारी परमेश्वर नेताम ने खरीददार अशोक कुमार अग्रवाल के नाम पर उक्त जमीन का फर्जी नामान्तरण करके फर्जी ऋण पुस्तिका भी बना दिया लेकिन खरीददार को बाद में पता चला कि जिस आदमी से उसने जमीन खरीदा है, उस आदमी के नाम पर उक्त जमीन रेवेन्यू रेकार्ड में कभी दर्ज ही नहीं रही है बल्कि उसे दिया गया खसरा बी-।, ऋण पुस्तिका आदि जाली दस्तावेज हैं तथा खरीददार के नाम पर जारी ऋण पुस्तिका और नामान्तरण भी फर्जी है क्योंकि राजस्व रेकार्ड में यह जमीन जिन्दल पावर के नाम पर दर्ज है । अपने साथ हुई इस ठगी का शिकार अशोक कुमार अग्रवाल आरोपीगण के विरुद्ध कार्यवाही की मांग को लेकर पुलिस थाना लैलुंगा और एस0पी0 कार्यालय रायगढ़ का चक्कर काटता रहा लेकिन दबंग एस0डी0एम0 के विरुद्ध अपराध कायम करने की हिम्मत पुलिस आखिर दम तक नहीं जुटा पाई, तब पीड़ित ने न्यायालय की शरण लिया एवं न्यायालय ने पूरे कागजात देखने और पुलिस प्रतिवेदन का अध्ययन करने के बाद आरोपी एस0डी0एम0 अशोक मार्बल, पटवारी परमेश्वर नेताम, भूमि विक्रेता बिहारी लाल पटेल एवं गवाह सुरेन्द्र गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा 417, 418, 419, 420, 467, 468, 469, 470, 120 बी के तहत अपराध पंजीबद्ध करने का आदेश दिया, जिसके पश्चात पुलिस थाना लैलुंगा में इन आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 312/2025 दर्ज किया गया ।
आरोपीगण की जमानत खारिज करने के संबंध में न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आपत्तिकर्ता के वकील अशोक कुमार मिश्रा, आशीष कुमार मिश्रा ने कहा कि इस आदेश से समाज में कानून न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वासपूर्ण सकारात्मक संदेश गया है एवं खुद को कानून से ऊपर मानकर बेहिचक अपराध करने वाले अधिकारियों के मन में अपराध के प्रति अब निश्चित रूप से भय उत्पन्न होगा ।
पीड़ित अशोक कुमार अग्रवाल ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे पूरा विश्वास था कि इतने प्रभावशाली अधिकारी के विरुद्ध उसकी सुनवाई न्यायालय के अलावा और कोई नहीं करेगा तथा यह आदेश उसके विश्वास की कसौटी पर खरा उतरा है, जो ‘‘सत्यमेव जयते‘‘ की सार्थकता का जीता-जागता प्रमाण है।

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