जिले के गुडेली स्थित एक क्रेशर पर डमरुआ की लगातार पड़ताल कई नई परतें खोल रही है।ऊपर से सामान्य दिखने वाला यह क्रेशर, अंदर गहराई में कुछ ऐसी गतिविधियों से जुड़ा प्रतीत होता है,जो किसी भी दिन बड़े विभागीय एक्शन का कारण बन सकती हैं।गुडेली क्षेत्र में पिछले कई महीनों से स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यह क्रेशर जितना दिखाता है, उसका असल संचालन उससे कहीं अधिक बड़ा है।
डमरुआ की पड़ताल में मिली जानकारी इस शक को और मजबूत करती है।
⚡ 1. गुडेली खदानों से आने वाले पत्थर का हिसाब–किताब संदिग्ध
गुडेली क्षेत्र में खदानों की संख्या सीमित है,
लेकिन इस क्रेशर में रोज जितनी मात्रा में पत्थर प्रोसेस होता है,
उसके मुकाबले कच्चे पत्थर का स्रोत साफ नहीं बैठता।
डमरुआ की पड़ताल में सामने आए संकेत:
* खदान से निकासी का आंकड़ा कम
* क्रेशर की मशीनों की आउटपुट ज्यादा
* और ट्रकों की ढुलाई इससे भी ज्यादा
तीनों रिकॉर्ड एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।
खनिज विभाग ऐसी स्थिति को सीधा “अनियमितता की संभावना” मानता है।यह गुडेली स्थित क्रेशर का सबसे बड़ा लूज पॉइंट माना जा सकता है।
💰 2. रॉयल्टी भुगतान — गुडेली क्षेत्र में सबसे बड़ा झोल?
डमरुआ की जांच में रॉयल्टी के रिकॉर्ड ने कई सवाल खड़े किए:
* कुछ दिनों में उत्पादन अधिक, रॉयल्टी बेहद कम
* चालान संख्या ढुलाई के अनुमान से कम
* कई तारीखों में कोई एंट्री ही नहीं
गुडेली क्षेत्र में ऐसा कम ही देखा जाता है कि उत्पादन और रॉयल्टी का हिसाब इतना बेमेल हो।अगर खनिज विभाग ने रैंडम चेकिंग कर ली,तो यह क्रेशर सीधे जांच के केंद्र में आ सकता है।
🚛 3. गुडेली की रातें और ट्रकों की आवाजाही — सबसे गहरा संदेह**
गुडेली के ग्रामीणों का दावा है कि रात में इस क्रेशर की ओर ट्रकों की असामान्य आवाजाही होती है।
डमरुआ की पड़ताल में जुड़े संकेत:
* रात में बिना पर्ची के ट्रिप
* कई गाड़ियाँ ओवरलोड
* रिकॉर्ड में शामिल न होने वाले वाहन
* GPS ट्रैकिंग का अभाव
ये बातें किसी भी क्रेशर को सीधे विभागीय रडार पर ले आती हैं।अगर इस पहलू की जांच हुई,तो कई छुपी हुई गतिविधियाँ सामने आ सकती हैं।
🌫️ 4. पर्यावरण मानकों में गड़बड़ी — गुडेली का सबसे संवेदनशील मुद्दा**
गुडेली में धूल और प्रदूषण पहले से चर्चा का विषय रहा है।
इस क्रेशर में:
* धूल दमन प्रणाली कई बार बंद
* पानी छिड़काव का रिकॉर्ड उपलब्ध न होना
* मशीनों के संचालन समय और बिजली खपत में अंतर
* शोर और धुआँ तय सीमा से ऊपर
पर्यावरण विभाग ऐसे मामलों में बहुत सख्ती दिखाता है।एक औचक निरीक्षण में CTO रद्द होने तक की स्थिति बन सकती है।
⚖️ 5. तीन विभाग एक साथ उतर गए तो ‘गुडेली क्रेशर’ की फाइल खुल जाएगी**
डमरुआ की पड़ताल बताती है कि अगर कभी—
* खनिज विभाग
* पर्यावरण विभाग
* राजस्व विभाग
ने संयुक्त जांच की,तो गुडेली स्थित इस क्रेशर का पूरा ढांचा हिल सकता है।कच्चे माल से लेकर रात की ढुलाई,रॉयल्टी मिलान से लेकर पर्यावरण रिपोर्ट तक—हर परत खुलने की संभावना है।
🚨 बहरहाल: गुडेली का यह क्रेशर अब विभागीय नजरों के बेहद करीब
डमरुआ कोई आरोप नहीं लगा रहा,लेकिन गुडेली स्थित इस क्रेशर की गतिविधियों पर जो तथ्य सामने आए हैं,
वे यह संकेत देते हैं कि मामले में गंभीर अनियमितताएँ हो सकती हैं
अगर किसी भी दिन कोई विभाग“गुडेली निरीक्षण” पर निकल पड़a तो इस क्रेशर के लिए आने वाले दिन बेहद कठिन साबित हो सकते हैं।