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खनिज विभाग की कार्रवाई या खानापूर्ति? गुडेली में खुलेआम अवैध खनन पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 30 नवंबर 2025।
जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण को लेकर खनिज विभाग ने 26 से 28 नवंबर तक लगातार कार्रवाई का दावा किया है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के निर्देश पर बनाई गई टीम ने जेटीसीबी, ट्रैक्टर और हाईवा सहित कई वाहनों को जप्त कर कार्रवाई की जानकारी दी है। जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट में इन्हें “कड़ी कार्रवाई” बताया गया है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये कार्रवाई जमीनी हकीकत बंद कर पाने में सक्षम है, या फिर यह सिर्फ कागजों में सीमित औपचारिकता है?


गुडेली में दिनदहाड़े चूना पत्थर का अवैध उत्खनन – प्रशासन क्यों खामोश?

प्रेस नोट में सरिया और कोसीर क्षेत्र की कार्रवाई का ब्योरा तो है, लेकिन गुडेली का नाम तक नहीं— जबकि गुडेली और आसपास के इलाकों में

  • चूना पत्थर का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन,
  • बिना रॉयल्टी के परिवहन,
  • और क्रेशरों में खुलेआम खपाने की जानकारी लंबे समय से सामने आती रही है।

गुडेली में चल रहा अवैध खनन महज़ छोटे स्तर का नहीं, बल्कि कमर्शियल स्केल पर चलता नेटवर्क कहा जाता है, जहां
✔ न रॉयल्टी दी जाती है
✔ न परिवहन परमिट होता है
✔ और शासन को होने वाले करोड़ों के राजस्व नुकसान की ओर कोई ध्यान नहीं देता

फिर सवाल उठता है —
क्या यहां कार्रवाई करने से जिला प्रशासन पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव है?
क्या अधिकारियों तक निजी लाभ पहुंच रहा है?
या फिर खनन माफियाओं का खौफ इतना है कि कार्रवाई का नाम तक नहीं लिया जाता?

ये सवाल इसलिए भी बड़े हो जाते हैं क्योंकि खनिज विभाग के वही अधिकारी, जो दूसरी जगह छापेमारी कर रहे हैं, गुडेली में नजरअंदाज की नीति अपनाते दिखते हैं।


जनसंपर्क के प्रेस नोट में कार्रवाई – लेकिन जमीनी स्तर पर मामला उलट?

जनसंपर्क विभाग ने जिस कार्रवाई के आंकड़े पेश किए हैं, वे यह संदेश देते हैं कि प्रशासन सक्रिय है।
लेकिन दूसरी तरफ गुडेली में चर्चा हैं कि अवैध खनन आज भी उसी तेज़ी से जारी है—जिससे यह धारणा बनती है कि कहीं न कहीं कार्रवाई “चुनिंदा जगहों” तक सीमित है।

लोग पूछ रहे हैं—
अगर प्रशासन सख्त है, तो गुडेली में कार्रवाई का एक भी उल्लेख क्यों नहीं?
क्या माफियाओं की पकड़ इतनी मजबूत है कि खनिज विभाग का पूरा अमला अनदेखा कर रहा है?


गरीब पर सख्ती – माफियाओं पर नरमी, आखिर क्यों?

कई मौके पर देखा गया है कि

  • छोटे ट्रैक्टर चालकों पर भारी जुर्माना
  • लेकिन बड़े पैमाने पर चूना पत्थर निकालने वाले ठेकेदारों व क्रेशरों पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं

यह दोहरी नीति जनता के मन में यह सवाल पैदा करती है कि—
“क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है?”


जिले में कार्रवाई जारी रहने का दावा – लेकिन गुडेली की बारी कब आएगी?

प्रेस नोट के अनुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, पर जिले के सबसे संवेदनशील क्षेत्र गुडेली का नाम इसमें शामिल न होना
एक गंभीर सवाल है, जिसे प्रशासन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

गुडेली में अवैध खनन से हो रहे राजस्व नुकसान की जांच, क्रेशरों में अवैध पत्थर सप्लाई की चेन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।


 

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