अमन सिंघानिया और आवेश अग्रवाल के अलावा रायगढ़ और सारंगढ़ जिले के दर्जन भर से भी ज्यादा लाडलो ने की सरकारी खजाने में सेंधमारी
जीएसटी फ्रॉड की परतें और गहरी हुईं
डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। शेल कंपनियों के जरिए किए गए 90 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट फ्रॉड केस में जांच एजेंसियों ने अब गहराई से पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। डीजीजीआई सेंट्रल जीएसटी द्वारा गिरफ्तार किए गए अमन सिंघानिया और आवेश अग्रवाल से पूछताछ में ऐसे नए नाम सामने आए हैं जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर बड़ी भूमिका निभाई। आवेश अग्रवाल पिता स्व. अशोकअग्रवाल कोतरा रोड रायगढ़ का निवासी है, जबकि अमन सिंघानिया पिता अजय सिंघानिया ढिमरापुर रोड कृष्णा विहार में रहता है। दोनों से हुई पूछताछ के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि फर्जी कंपनी रजिस्ट्रेशन, कागज़ों पर करोड़ों के लेन-देन और बिना किसी वास्तविक सप्लाई के भारीभरकम टैक्स क्रेडिट लेने का यह खेल अकेले दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से संचालित हो रहा था।
जांच टीम के रडार पर साकेत अग्रवाल भी है, जो मूल रूप से सरिया का निवासी है। प्रारंभिक जांच में उसका नाम कई वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हुआ सामने आया है और टीम उसके नेटवर्क, संपर्कों और बैंकिंग गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है। साकेत की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूर्ण होने के बाद ही आएगा, लेकिन उसकी गतिविधियां जांच एजेंसियों की विशेष निगरानी में हैं।
शुभम अग्रवाल से जुड़ी जानकारियां भी मामले को नई दिशा दे रही हैं। प्रारंभ में उसे बरमकेला का बताया गया था, जबकि जांच में यह तथ्य सामने आया है कि वह छत्तीसगढ़ का नहीं बल्कि उड़ीसा का निवासी है। शुभम अग्रवाल लंबे समय से फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग का कार्य कर रहा है और बरमकेला से रायगढ़ के बीच नियमित रूप से अप-डाउन करता रहा है। उसकी जीवनशैली अत्यधिक महंगी होने और आय के स्रोतों में असंगतियों की वजह से भी जांच एजेंसियों का ध्यान उसकी ओर गया है। उसे इस नेटवर्क से जुड़े कई कागजी लेन-देन और फर्जी फर्मों के संपर्कों से जोड़ा जा रहा है। उसकी तलाश जारी है और उसके मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और ट्रांसपोर्टिंग रूट का भी विश्लेषण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि शुभम की भूमिका सामने आने पर फ्रॉड की रकम और इसके दायरे का वास्तविक पैमाना और साफ होगा।
डीजीजीआई ने दोनों मुख्य आरोपियों को राउरकेला ले जाकर पूछताछ की है, जहां आवेश को कोर्ट में पेश कर 14 दिनों की रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कई कंपनियों के नाम पर किए गए पंजीयन और जीएसटी फाइलिंग संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बिना की गई थीं। अधिकांश आधार कार्ड और पैन नंबर ऐसे लोगों के पाए गए जिन्हें अपने नाम पर खोली गई फर्मों की जानकारी तक नहीं थी। बिना किसी माल की आपूर्ति किए करोड़ों का कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना इस फ्रॉड की प्रमुख विशेषता रही है। टीम ओडिशा और छत्तीसगढ़ में फैले इस रैकेट के सभी डिजिटल ट्रेल, बैंकिंग दस्तावेज और जीएसटी फाइलिंग की समीक्षा कर रही है।
पूरी कार्रवाई के दौरान यह भी संकेत मिले हैं कि इस फर्जीवाड़े का एक बड़ा सरगना अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है, जो पर्दे के पीछे से पूरे गिरोह का संचालन करता रहा है। उसके ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है और उस पर शिकंजा कसने की तैयारी अंतिम चरण में बताई जा रही है। माना जा रहा है कि मुख्य सरगना के पकड़े जाने के बाद इस बड़े वित्तीय घोटाले की पूरी रूपरेखा सार्वजनिक हो सकेगी।
जांच में नई कड़ियां, नेटवर्क की जड़ें और गहरी
जांच एजेंसियों ने फ्रॉड से जुड़े कई व्यक्तियों के वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। साकेत अग्रवाल और शुभम अग्रवाल की भूमिका की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। शुभम का फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग व्यवसाय और उसकी अत्यधिक महंगी जीवनशैली एजेंसियों के संदेह का मुख्य कारण बनी हुई है। साकेत के खिलाफ मिले दस्तावेज और उसके पिछले व्यवसायिक संबंधों की जांच भी समानांतर रूप से जारी है। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना है क्योंकि जांच टीम फर्जी कंपनियों, बैंक ट्रांजेक्शनों और पूरे नेटवर्क के संचालक तक पहुंचने के लिए लगातार साक्ष्य इकट्ठा कर रही है। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि फ्रॉड की कुल रकम 90 करोड़ से कहीं अधिक हो सकती है।