कई आदेशों और भूमि आबंटन की प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवाल
डमरूआ न्यूज़ /रायगढ़। जिले में सरकारी भूमि के विवादित हस्तांतरण और कथित रूप से प्रभावशाली परिवारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पुराना बड़ पारा केलो तट से शहीद चौक होते हुए रामनिवास टाकीज के बीच स्थित कई भू- खंड नियमों को दरकिनार कर सरकारी भूमि को त्रुटिपूर्ण तरीके से निजी स्वामित्व में दे दिए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। जो जानकारी निकाल कर सामने आई है उसमें विभिन्न वर्षों में जारी आदेशों, भूमि अभिलेखों और नामांतरण की प्रक्रियाओं में कई अनियमितताएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
बेहद विवादित है सर्वे नंबर 58
सर्वे नंबर 58 और उससे संबंधित भूमि पर वर्ष 2019 से 2021 के बीच निरंतर आदेश पारित किए गए। इन आदेशों में भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत की गई। इसलिए सभी आदेशों की विस्तार से जांच की जाए, क्योंकि भूमि के स्वरूप और श्रेणी को बदले बिना उसका स्वामित्व प्रदान करना विधिक रूप से संभव नहीं था।
सार्वजनिक उपयोग की भूमि को भी डकार गए
उक्त भूमि वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रही है, जिसे कृषि योग्य मानकर निजी स्वामित्व देने की प्रक्रिया संदेह पैदा करती है। भूमि का वास्तविक उपयोग, नक्शा, सीमांकन और पूर्ववर्ती अभिलेख इसकी पुष्टि करते हैं कि यह क्षेत्र सार्वजनिक मार्ग और निकटवर्ती बसाहटों के लिए आवश्यक भू-भाग था, जिसे बिना स्थल निरीक्षण के परिवर्तित नहीं किया जा सकता।