पुलिस पर राजनीतिक दबाव या किसी अन्य बात का असर, यहां नियम कानून हो रहे बेअसर
रायगढ़ : क्राइम पेट्रोल की तर्ज पर बच्चों ने बनाया गैंग और कर दी 70000 रुपए की चोरी, एक सप्ताह बाद भी पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई!
डमरूआ न्यूज, रायगढ़।
चक्रधर नगर पुलिस की कार्यप्रणाली स्वतंत्रता दिवस से स्वतंत्र हो गई है. यहां की पुलिस को ना तो अपने अधिकारियों के फरमान की कोई परवाह है और नहीं नियम कानून और संविधान का कोई ख्याल है. अपने थाना क्षेत्र में अपराध की न्यूनता दिखाने FIR दर्ज नहीं की जा रही है. चोरी की शिकायत के बाद शिकायतकर्ता को कार्रवाई न करने की धमकी दी जा रही है और इस कार्य के लिए चक्रधर नगर पुलिस आरोपियों का भरपूर प्रोत्साहन कर रही है. यही कारण है कि घटना के आठ दिन बाद भी चक्रधर नगर पुलिस FIR दर्ज करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है.
स्वतंत्रता दिवस के दिन जब पूरा देश जश्न मना रहा था, उसी वक्त रायगढ़ शहर में चोरी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के सिंधी कॉलोनी में 12 से 17 साल के नाबालिग बच्चों के गैंग ने मिलकर एक घर में धावा बोला और करीब 70,000 रुपए नकद व कीमती सामान चोरी कर ले गए।
वृद्धा को उलझाकर वारदात को दिया अंजाम
15 अगस्त की दोपहर घर के सभी सदस्य किसी काम से बाहर गए हुए थे और घर में सिर्फ एक वृद्धा मौजूद थीं। इसी दौरान बच्चों के गैंग के एक सदस्य ने वृद्धा को बातों में उलझाए रखा और बाकी साथियों ने घर में रखी नकदी व सामान पर हाथ साफ कर दिया।
सीसीटीवी में कैद पूरा घटनाक्रम
पीड़ित परिवार ने बताया कि बच्चों का पूरा कारनामा घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में साफ तौर पर कैद हो गया है। फुटेज में बाल अपचारियों की हरकतें स्पष्ट दिख रही हैं। इसके बावजूद स्थानीय थाने की पुलिस ने अब तक न तो कोई मामला दर्ज किया है और न ही जांच की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह “बाल अपचारी गैंग” लंबे समय से इलाके में सक्रिय है और चोरी की कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है। लेकिन पुलिस की निष्क्रियता के चलते बच्चों का हौसला बढ़ता जा रहा है। मोहल्लेवासियों ने सवाल उठाया है कि जब सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है तो पुलिस क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है।
पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि वे कई बार थाना चक्रधर नगर के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद पुलिस की चुप्पी ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानून विशेषज्ञ की राय
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय दंड संहिता व किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार ऐसे मामलों में पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करनी चाहिए। नाबालिग होने की स्थिति में बच्चों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, लेकिन पुलिस की देरी कानून की मंशा के खिलाफ है।
पुलिस अधीक्षक से भी की गई शिकायत
चक्रधर नगर पुलिस द्वारा एक सप्ताह बाद भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं किये जाने इसके बाद पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को भी घटना के संबंध में पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन अब तक के संबंध में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो सकी है.
पुलिस की सुस्ती दे रही अपराध को बढ़ावा
चक्रधर नगर पुलिस द्वारा 1 सप्ताह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं किया जाने से बाल आचारियों को अपराध करने के लिए प्रोत्साहन देने जैसा कार्य किया जा रहा है. मोहल्ले में छुटपुट चोरी सहित अन्य घटनाएं पूर्व में भी होती रही है लेकिन बाल आचारियों के स्क्रिप्ट पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता था यही कारण है कि आज उन बाल बालअपचारियों द्वारा बड़ी चोरी की घटना को अंजाम दिया गया है यदि इन्हें अभी नहीं रोका गया और उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो निश्चित रूप से किसी भी दिन इससे भी बड़ी वारदात को अंजाम दिए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.
डरा सहमा हुआ है पीड़ित परिवार
पीड़ित परिवार और मोहल्ले के रहवासियों ने जिला पुलिस प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने, गैंग को पकड़ने और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की मांग की है। पीड़ित परिवार डर के साए में है कि बाल आचारियों द्वारा इसी प्रकार से किसी अन्य बड़ी वारदात को भी अंजाम दिया जा सकता है.