फर्जी ग्रामसभा का पर्दाफाश: 12 गांवों के ग्रामीणों ने अदानी पर बोला हमला, प्रशासन की चुप्पी पर भड़का गुस्सा
Damrua News / रायगढ़। अदानी ग्रुप की साजिशों का नया सीजन शुरू—“फर्जी ग्रामसभा लिमिटेड”! इस सीरियल के ताज़ा एपिसोड में दलालों को ग्रामीण बनाकर कलेक्ट्रेट पहुंचाया गया और खदान चालू करने की मांग ठोक दी गई। लेकिन असली ग्रामीणों ने स्क्रिप्ट पलट दी और इस फर्जीवाड़े का ट्रेलर धूल में मिला दिया।
मुड़ागांव में 12 गांवों के असली ग्रामीणों की “रियल ग्रामसभा” जुटी और अडानी के फर्जी शो का पर्दाफाश कर दिया। गुस्साए ग्रामीण बोले—“हमारी जमीन कोई Netflix सीरीज़ नहीं है, जो अडानी अपने पैसे से खरीद ले और मनचाहा प्लॉट चला दे!”
सबसे दिलचस्प सीन प्रशासन का रहा। शिकायतें कलेक्टर, एसपी, थाना—हर जगह पहुंचीं, लेकिन नतीजा वही निकला—“एडमिनिस्ट्रेशन नॉट रेस्पॉन्डिंग”। कलेक्टर साहब ने तो साफ कह दिया—“ये मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है।” अब जनता पूछ रही है—“तो फिर आप किस इलाके के कलेक्टर हैं? दुबई के?”
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी जमीन लूटने की स्क्रिप्ट बंद नहीं हुई, तो अगला एपिसोड सड़कों पर होगा। एक महिला ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा—“पत्रकारों को धमकाकर अदानी समझ रहा है कि न्यूज़ चैनल भी प्राइवेटाइज हो गया है। लेकिन भूल गया कि जनता का न्यूज़ चैनल बंद नहीं होता।”
12 गांवों की “रियल ग्रामसभा” ने पलटी स्क्रिप्ट
बुधवार को मुड़ागांव में हुई विशाल बैठक में 12 गांवों—मुड़ागांव, सराईटोला, कुंजेमुरा, पाता, बांधापाली, चित्तवाही, रोडोपाली, खम्हरिया, मिलूपारा, गारे, कोसमपाली और बागबाड़ी—के सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बैठक में सरपंचों, बीडीसी सदस्यों, पंचों, महिलाओं और युवाओं ने साफ कहा—
“हमारी जमीन लूटने की अदानी की साजिश को हम खून के आखिरी कतरे तक बर्दाश्त नहीं करेंगे!”
पूरा प्रशासन अदानी की अदा में उलझा
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने तमनार थाने, एसपी रायगढ़ और कलेक्टर तक कुल छह बार शिकायतें दीं, लेकिन हर जगह से मिला सिर्फ़ “फॉरवर्ड कर देंगे” वाला जवाब। कलेक्टर ने तो साफ कह दिया कि ये उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस पर ग्रामीणों ने तंज कसा—
“तो फिर कलेक्टर साहब किस इलाके के कलेक्टर हैं? रायगढ़ के या अदानी के हेड ऑफिस के?”
“कानून अंधा, बहरा और लंगड़ा हो गया है”
सभा में मौजूद ग्रामीण नेताओं ने कहा कि अदानी अपने पैसों से खरीदे गए दलालों को ‘ग्रामीण’ बनाकर प्रशासन के सामने पेश कर रहा है। एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा—
“आज कानून अंधा, बहरा और लंगड़ा हो गया है! हमारी असली ग्रामसभाएं नकार दी जा रही हैं और फर्जी ग्रामसभा का ढिंढोरा पीटा जा रहा है।”
पत्रकारों पर हमले ने और भड़काया गुस्सा
हाल ही में जब कुछ पत्रकारों ने इस मुद्दे को उजागर करना चाहा तो उन पर भी अदानी समर्थकों ने हमला किया। इस पर ग्रामीण महिला राधा बाई ने तल्ख लहजे में कहा—
“अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो हमारी आवाज कौन सुनेगा? अदानी की गुंडई अब हद से गुजर चुकी है।”
ग्रामीणों की चेतावनी – आंदोलन तय
बैठक में फैसला हुआ कि अगर शासन स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो ग्रामीण महाजेनको और अदानी के खिलाफ विशाल आंदोलन करेंगे। एक ग्रामीण नेता ने कहा—
“अब फैसला जनता की सड़क पर होगा। अदानी की साजिशें आग में जलकर राख होंगी और जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
अब रायगढ़ की गली-गली में एक ही सवाल घूम रहा है—
“ग्रामसभा असली है या नकली?”
“सरकार जनता की है या अदानी की आउटसोर्स्ड कंपनी?”
अगर प्रशासन ने आंख मूंदे रखीं, तो रायगढ़ की सड़कें जल्द ही आंदोलन का अखाड़ा बनेंगी और “फर्जी ग्रामसभा लिमिटेड” का पूरा सेट जलकर राख हो जाएगा। बहरहाल रायगढ़ में अदानी और प्रशासन की कथित मिलीभगत पर सवाल गहराते जा रहे हैं। ग्रामीणों का गुस्सा अब ज्वालामुखी बन चुका है। सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की मांगें सुनेंगे या फिर रायगढ़ की सड़कें अदानी विरोधी आंदोलन का नया अखाड़ा बनेंगी।