गृह मंत्रालय और जिला दण्डाधिकारी द्वारा हेमेन्द्र सिंह के जिला बदर आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
धमतरी कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने का दिया आदेश
Damrua न्यूज़ /बिलासपुर.
छत्तीसगढ़ी फिल्म संस्थान से जुड़े हेमेन्द्र सिंह राजपूत आत्मज सातम सिंह के जिला बदर आदेश पर रोक लगाते हुये छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने धमतरी के कलेक्टर को 19 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अपना शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।
धमतरी के टी.आई. और पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत आपराधिक रेकार्ड और प्रतिवेदन के आधार पर जिला दण्डाधिकारी धमतरी ने आपराधिक प्रकरण क्रमांक 20241113010002/2024-25 में दिनांक 14/02/2025 को आदेश पारित कर हेमेन्द्र सिंह को धमतरी, रायपुर, दुर्ग, बालोद, कांकेर, कोण्डागांव और गरियाबंद की राजस्व सीमाओं से बाहर करने का आदेश दिया था, जिसे चुनौती देते हुये मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के गृहमंत्रालय में अपील पेश की गई थी एवं गृह मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ के समक्ष लिखित और मौखिक तर्क प्रस्तुत किया गया था परंतु अपर मुख्य गृह सचिव ने 27 जून को अपील खारिज कर जिलादण्डाधिकारी धमतरी के आदेश की पुष्टि कर दिया ।
गृहमंत्रालय द्वारा अपील खारिज होने पर मिश्रा चेम्बर रायगढ़ द्वारा एडवोकेट हरि अग्रवाल के मार्फत इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में WPCR No. 454/2025 पेश कराई गई, जिसमें एडवोकेट हरि अग्रवाल द्वारा तर्क पेश किया गया । इस अपील में प्रमुख रूप से यह आधार लिया गया कि जिला दण्डाधिकारी धमतरी की आर्डरशीट के अनुसार दिनांक 24/01/2025 को जिला दण्डाधिकारी भ्रमण पर थे, ऐसी स्थिति में दिनांक 24/01/2025 को गवाहों का बयान कैसे दर्ज हो गया एवं इन गवाहों के प्रतिपरीक्षण का अवसर दिये बिना हेमेन्द्र सिंह के जिला बदर का आदेश कैसे पारित कर दिया गया ? एवं इन महत्वपूर्ण विसंगतियों की ओर बिना कोई विचार किये छत्तीसगढ़ शासन के गृह मंत्रालय ने अपील निरस्त कर दिया ।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस बिंदु को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी धमतरी को दिनांक 19/08/2025 को अपना व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है एवं जिला दण्डाधिकारी के आदेश और गृह मंत्रालय के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दिया है ।
इस मामले में हेमेन्द्र सिंह राजपूत के एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि धमतरी की पुलिस ने हेमेन्द्र को अपराधी ठहराने की जो सूची कलेक्टर के समक्ष पेश किया था, उस सूची में कई ऐसे मामले हैं, जो किसी अन्य आरोपी से संबंधित हैं इसीलिये इन प्रकरणों की मांग करने पर पुलिस ने इसे पेश करने से बचने के लिये इन रेकार्डस के जल जाने का झूठा स्पष्टीकरण पेश कर दिया । हेमेन्द्र सिंह के विरुद्ध भारतीय दण्ड विधान की जिन गंभीर धाराओं के अपराध का उसे अपराधी होना बताया गया है, उन मामलों में वह न्यायालय से दोषमुक्त हो गया है एवं किसी भी प्रकरण में उसे कारावास की कोई सजा नहीं मिली है बल्कि केवल एक प्रकरण में उसे मामुली जुर्माना हुआ है एवं वह कोई खतरनाक अपराधी नहीं है बल्कि ईरा फिल्म प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड और PVB फिल्ड प्रोडक्शन का जनरल मैनेजर है तथा शिक्षित नवयुवक है।
हाईकोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि यह आदेश न्याय के जिन्दा होने का सबूज है क्योंकि झूठ की बुनियाद पर टिके इस मामले में सच्चाई सुनने के लिये न तो पुलिस तैयार थी, न प्रशासन के आला आफीसर्स ही तैयार थे ।
श्री अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि उन्हें तब और भी खुशी हुई होती, जब गृहमंत्रालय द्वारा ही इन बिन्दुओं पर विचार करके अपील मंजूर कर ली जाती परंतु यह दुर्भाग्य जनक है कि शासन स्तर पर भी इस मामले में गंभीरता से बिना कोई विचार किये हेमेन्द्र की अपील खारिज कर दी गई ।
युवा, जिन्हें देश का भविष्य कहा जाता है, को रचनात्मक और राष्ट्रहित की भूमिका निभाने की मुख्य धारा में वापस लाने की दिशा में प्रेरित करने के बजाए उनका जिला बदर करके उन्हें अपराध की दिशा में ढकेलने की नीति से कल्याणकारी राज्य का सपना साकार नहीं हो सकता है ।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ताजा आदेश निश्चित रूप से दोषपूर्ण प्रशासनिक आदेशों के सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।