Damrua

तमनार के कोलम गांव में  चित्रसेन लिख रहे खुड़खुडिया की पटकथा

पुलिस-पंचायत की मिलीभगत से पनप रहा जुए का साम्राज्य, जनता हो रही लूट का शिकार

रायगढ़/तमनार।
कोलमा गांव में “खुड़खुडिया” नामक जुए का खेल अब सिर्फ एक खेल नहीं रह गया है, यह अब एक खुलेआम चलता अवैध कारोबार बन चुका है। गांव में जिस तरह से खुलेआम पत्ते बिछाए जा रहे हैं और हर दिन लाखों की रकम का दांव लगाया जा रहा है, वह यह बताने को काफी है कि इस खेल के पीछे मजबूत संरक्षण मौजूद है। स्थानीय लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि “कोलम गांव में तो महाराजा चित्रसेन बैठकर खुड़खुडिया की पटकथा लिख रहे हैं।”

दरअसल, कोलमा और आसपास के इलाकों में पिछले कई महीनों से अवैध जुआ-सट्टा का सिलसिला जारी है। दिन हो या रात, गांव के कुछ चिन्हित स्थानों पर बड़े स्तर पर खुड़खुडिया नामक पारंपरिक पत्तों वाला जुआ खेला जा रहा है, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर कुछ पुलिस कर्मियों तक की मौन सहमति बताई जा रही है।

पंचायत प्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप

कोलमा पंचायत के कुछ प्रतिनिधियों पर आरोप है कि वे इस अवैध खेल को न केवल नजरअंदाज कर रहे हैं, बल्कि आयोजनों में अप्रत्यक्ष भूमिका भी निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ग्रामीण शिकायत करते हैं, तो या तो उन्हें चुप कराया जाता है या उल्टे धमकाया जाता है।

पुलिस की चुप्पी, संरक्षण की गवाही?

जिले के जिम्मेदार पुलिस अधिकारी और थाना स्टाफ तक को बार-बार अवगत कराए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है। इससे यह संदेह और गहरा होता जा रहा है कि कहीं न कहीं पुलिस का संरक्षण इस अवैध गतिविधि को मिल रहा है। सूत्रों का कहना है कि समय-समय पर दिखावटी कार्यवाही कर खानापूर्ति की जाती है, जबकि असली संचालकों को हाथ तक नहीं लगाया जाता।

IMG 20250724 WA0017

युवाओं का भविष्य दांव पर

इस खेल में सबसे अधिक प्रभावित गांव के युवा हो रहे हैं, जो रोजगार या शिक्षा से भटककर इस आसान कमाई के फेर में फंसते जा रहे हैं। नशा, अपराध और कर्ज जैसी समस्याएं इसके साथ तेजी से बढ़ रही हैं। कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं लेकिन सत्ता-प्रशासन चुप बैठा है।

क्या होगी प्रशासन की अगली चाल?

कोलमा गांव में खुड़खुडिया अब एक मनोरंजन नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे को दीमक की तरह चाट रहा है। यदि समय रहते पुलिस और पंचायत प्रशासन ने इस पर लगाम नहीं लगाई, तो यह सिर्फ कोलम नहीं, आसपास के कई गांवों को भी अपने चपेट में ले लेगा।

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन “चित्रसेन” की यह पटकथा रोक पाएगा या फिर यह अवैध नाटक यूं ही चलता रहेगा?

Facebook
WhatsApp
Twitter
Telegram