सरिया में चल रही खाद भ्रष्टाचारियों की पुरुवईया
Damrua /सरिया (छत्तीसगढ़): सरिया नगर पंचायत क्षेत्र में नकली खाद की कालाबाज़ारी का जिन्न एक बार फिर बोरे से बाहर आ गया है। हाल ही में एक गोदाम में हुई छापेमारी में 250 बोरी संदिग्ध डीएपी खाद जब्त की गई। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी सरिया के कुछ व्यापारियों पर नकली खाद बेचने के गंभीर आरोप लग चुके हैं, पर हर बार मामला कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
व्यापारी-अधिकारी गठजोड़ की कहानी दोहराई जा रही है
हर बार जब नकली खाद का पर्दाफ़ाश होता है, तो ऐसा लगता है कि अब दोषियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन व्यापारी अपने रसूख और पैसों के दम पर “ऊपर तक पुल” बनाकर पूरे मामले को धुंधला कर देते हैं। कार्रवाई दिखावटी रह जाती है और मूल मुद्दा – किसान की मेहनत और उसकी फसल – भुला दी जाती है।सबसे बड़ा नुकसान किसे? किसान को!
- किसान भरोसा करता है शासन-प्रशासन और लाइसेंस प्राप्त डीलरों पर।
- वह कर्ज लेकर या उधारी पर खाद खरीदता है।
- नकली खाद उसकी फसल को बर्बाद कर देती है, लेकिन इसके लिए जवाबदेह कोई नहीं होता।
- किसान की मेहनत, उम्मीदें और पूंजी – तीनों नष्ट हो जाती हैं।
❝सरिया के बाजारों में “नवरत्न” नाम की बोरी में असल में “धोखा” पैक किया जा रहा था❞
यह केवल खाद का नहीं, किसानों के भविष्य का हनन है
सरिया धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ का ‘नकली खाद हब’ बनता जा रहा है। न केवल डीएपी, बल्कि अन्य उर्वरकों में भी पहले चंदन की महक जैसी नकली गंध डाली जाती थी – ताकि दिखावा किया जा सके। अब उसी परंपरा को नई चालबाजियों से आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब सवाल उठता है:
- क्या इस बार दोषियों पर सख़्त कार्रवाई होगी या फिर पूर्व की तरह मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
- कितने किसान अब तक प्रभावित हुए, और उनकी भरपाई कौन करेगा?
- क्यों नहीं बनाई जाती स्थायी जिला स्तरीय निगरानी समिति, जो खाद क्वालिटी की नियमित जांच करे
किसानों की मांग:
- नकली खाद बेचने वालों पर एफआईआर और जेल भेजा जाए।
- किसानों को हुए नुकसान की भरपाई शासन द्वारा की जाए।
- खाद कारोबारियों की पिछली शिकायतों की भी जांच खोली जाए।