प्रशांत डेनियल 7828438374
जिले में हुई मानवता शर्मसार, कटनी से बुलाकर मजदूरों से कराया गया काम मजदूरों के बच्चे भुगतान नहीं मिलने के कारण रोड पर भूखे पेट सोने को मजबूर
वन मंडल मरवाही अपने नए-नए कारनामों के लिए धीरे-धीरे बड़ा ही प्रसिद्धि प्राप्त करता जा रहा है
कहते हैं कि मजदूरों का पसीना सूखने से पहले उनकी मजदूरी उनको मिल जाना परंतु यहां तो मजदूरों के बच्चों को भूखे पेट रोड में सोना पड़ रहा है
जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहां वन मंडल मे पौधे लगाने के लिए गड्ढे खोदने थे जिस हेतु लोगों की आवश्यकता थी बीट गार्ड ने चालाकी कर मध्य प्रदेश के कटनी से 80 किलोमीटर दूर गांव से लगभग 24 लोगों को रोजगार देने के नाम पर थाढ पथरा केवची वन परिक्षेत्र में डिप्टी रेंजर तिवारी और बीट गार्ड ओम चंद मसराम द्वारा नगद भुगतान के नाम पर लोगों से गड्ढे खुदाई का काम करवाया गया गड्ढे खुदाई हो जाने के बाद लगभग 26 दिन के काम हो जाने तक मजदूरों को मजदूरी भुगतान नहीं किया गया और जब मजदूर आज मजदूरी भुगतान की मांग करने के लिए पहुंचे तो उन्हें खाता में भुगतान होने के बाद कहीं गए और उनसे खाता नंबर मांगा गया जबकि बीट गार्ड के द्वारा कुछ पैसे उन्हें नगद दिए गए थे सवाल यह पैदा होता है कि जब भुगतान खाते में किया जाना है तो क्या बीट गार्ड ने पैसे अपने जेब से दिए और यदि पैसे अपने जेब से दिए तो यह पैसे उसके पास आए कहां से यह तो यह शासन के पैसे की चोरी है या तो और कुछ.
. सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि मजदूर अपनी शिकायत लेकर जब मरवाही वन मंडल अधिकारी के पास कार्यालय मारना डिपो पहुंचे तो वहां उन्हें दो दिन के अंदर भुगतान खाते में करने की बात कही गई परंतु जबकि मजदूरों के पास खाने के लिए पैसे नहीं थे जबकि उनके छोटे-छोटे बच्चे थे और वह लगातार मांग कर रहे थे कि उनको नगद भुगतान दिया जाए ताकि वह अभी की तत्काल अपने लिए खाने की व्यवस्था एवं रहने की व्यवस्था कर सकें परंतु किसी भी अधिकारी ने उनकी बातों को संज्ञान में नहीं लिया और रात्रि में छोटे-छोटे मजदूर के बच्चे एवं मजदूर जिन्होंने शासन का बड़ा-बड़ा कार्य किया वह रोड पर भूखे पेट सोने को मजबूर हैं यह जिले को शर्मसार कर देने वाली घटना है.
जैसे ही इस घटना की खबर हमारी टीम को लगी हमने वहां पहुंचकर डीएफओ मैडम से बात की और डीएफओ मैडम ने दो दिन में खाते में उनके पैसे जमा करने की बात करेगी परंतु उनके तत्काल व्यवस्था की कोई बात नहीं हो पाई उन्होंने नगद भुगतान देने से साफ मना कर दिया जो कि शासन के नियम के खिलाफ है ऐसा कहा गया.
जबकि सवाल यह पैदा होता है कि छत्तीसगढ़ में लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और बाहर से मजदूर मंगा कर बीट गार्ड किस अधिकार से उनको मजदूरी करने के लिए रखा और उनका ना रहने की व्यवस्था की गई और ना उनके खाने की व्यवस्था की गई बीट गार्ड से जब मीडिया की टीम बात करना चाह रही थी उस समय बीट गार्ड मौके से बचते हुए नजर आए और वह उन्होंने मजदूरों को पहचाने से इनकार कर दिया. मजदूर के बच्चे हरि झन्नाटे दोपहर में जबकि नौतपा का सीजन चल रहा है इस भरी गर्मी में वह रेंज ऑफिस के सामने लेटे रहे रोड पर जबकि अधिकारी और कर्मचारी ऐसी में बैठकर एक का मजा ले रहे थे. मजदूरों को मजदूरी करने के बाद उनका भुगतान नहीं मिलना इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है जिन्होंने अपना खून पसीना लगातार बहाया है वही आज प्रताड़ित है यह एक बड़ा सवाल या निशान है फॉरेस्ट विभाग पर
धीरे-धीरे दिन बिता गया शाम हुई और शाम होने के बाद रात हो गई परंतु किसी अधिकारियों की नजर इन पर नहीं पड़ी यह देखना नहीं चाह रहे थे जिसके कारण मजदूर महिलाओं और उनके बच्चों को भूखे पेट रेंज ऑफिस के बाहर रोड के किनारे गिरते हुए पानी में सोना पड़ रहा है यदि किसी बच्चे को कुछ हो जाता है तो इसका जवाबदार कौन होगा. जैसे ही इस घटना की सूचना राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष इदरीस अंसारी को पड़ी उन्होंने मजदूरों की मदद करने के लिए तुरंत बच्चों के लिए कुछ सामग्री लेकर उस स्थान पर पहुंचे और मजदूरों की समस्याओं को सुना और और उन्होंने अपने आप में शर्मिंदगी महसूस की दूसरे जिले का दूसरे प्रदेश का व्यक्ति मजदूर हमारे प्रदेश में किस तरह से प्रताड़ित है इस बात को देखकर उन्होंने बहुत ही दुख और पीड़ा के साथ मजदूरों को जल्द से जल्द उनकी मजदूरी भुगतान करने की बात कही गई है. और बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर पर fir करने की बात कही
मीडिया और अन्य लोगों को खबर लगने के बाद डिप्टी रेंजर तिवारी और बीट गार्ड ओमचंद मसराम मौके पर पहुंचे और बात बिगड़ती देख मजदूरों को उचित व्यवस्था देने की बात कही जिस बीट गार्ड ने सुबह मीडिया के सामने मजदूरों को पहचानने से इनकार कर दिया था वही बीट गार्ड ओम चंद्र मसराम ने स्वीकार किया कि उनके बीच में मजदूरों के द्वारा कार्य किया गया है. जबकि डिप्टी रेंजर तिवारी कैमरे से बचते हुए नजर आए और उन्होंने इशारा करते हुए सर ठीकरा बीटगार्ड के ऊपर फोड़ दिया.
अब देखने वाली बात यह होगी कि वन मंडल अधिकारी को जब इस बात की खबर लग गई है तो वन मंडल अधिकारी बीट गार्ड एवं डिप्टी रेंजर को सस्पेंड करती है या फिर उनको अपना संरक्षण देती है. इस निंदनीय घटना से पूरा जिला शर्मसार है
ऐसे में कहां पूरा होगा सुशासन का सपना मोदी जी का यहां तो सब कुछ भ्रष्टाचारियों की भेट चढ़ रहा.